Farmer’s Anger : 35 गांवों के किसानों की हुंकार, खेतों को पानी नहीं दिया तो नहीं देंगे किसी को वोट

भाजपा के पूर्व विधायक चंद्रशेखर देशमुख और कांग्रेस विधायक सुखदेव पांसे पर वादा खिलाफी का आरोप

Today former News : बैतूल। विकासखंड प्रभात पट्टन में माह जून में नहर लाओ संघर्ष समिति आष्टा द्वारा मुख्य चार मांगों को लेकर विशाल किसान आंदोलन किया जाएगा। ग्राम आष्टा में बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं का समिति द्वारा जमकर विरोध किया जाएगा। गौरतलब है कि नहर लाओ संघर्ष समिति में 35 गांव के हजारों किसान जुड़े हुए हैं। इन किसानों ने नहर की मांग को लेकर भाजपा कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इन किसानों ने सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं कराने की दशा में आगामी चुनाव का बहिष्कार करने की भी चेतावनी दी है।
समिति के सदस्यों का आरोप है कि भाजपा कांग्रेस के नेताओं ने अपने शासनकाल में किसानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। पूर्व विधायक चंद्रशेखर देशमुख के कार्यकाल में विधानसभा के क्षेत्र वासियों को सरकार के द्वारा पारसदोह डैम की सौगात मिली थी। क्षेत्र का प्रत्येक किसान आशाओं के सपनों को लेकर बड़ा ही उत्साहित था, लेकिन विधायक देशमुख ने अपने क्षेत्रीय अन्नदाताओं को पारसडोह जलाशय की सिंचाई से वंचित रखकर कुछ शीर्ष नेताओं को खुश रखने के लिए दूसरी विधानसभा बैतूल की अन्य पंचायतों के किसानों को नहर का पानी देकर क्षेत्र के अन्नदाता ओं की भावनाओं से खिलवाड़ किया है। विधायक देशमुख ने क्षेत्रीय ग्रामीणों की प्यास की चिंता को ताक पर रखकर पारसडोह जलाशय से बचा हुआ जल बैतूल विधानसभा को पेयजल के लिए देकर किसानों की भावनाओं को आहत किया।

पूर्व विधायक ने पानी से वंचित कर निभाया फर्ज

नहर लावो संघर्ष समिति का कहना है कि 32 हजार वोटों से ज्यादा विजय का ताज मुलताई विधानसभा के भोले-भाले किसानों ने चंद्रशेखर देशमुख को पहनाया, बदले में विधायक देशमुख ने अपने फर्ज को क्षेत्रवासियों को पानी से वंचित रख कर निभाया है, इसलिए हम 35 गांव के किसान आने वाले विधानसभा में खुलकर विरोध करेंगे। दूसरी परिस्थिति में कर्ज के बोझ तले दबा हुआ किसान मदद के लिए आशा रूपी आंखों से निहार रहा था। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस विधायक सुखदेव पांसे ने क्षेत्र में प्रत्येक गांव के किसानों से मिलकर घोषणा की थी कि मैं आगे आगे चलूंगा और पीछे पीछे आपके सूखे खेतों को पानी देने वाली नहर खुद ही जाएगी, सुखदेव पांसे जीते भी और पीएचई मंत्री भी बने, लेकिन किसानों से किया गया वादा पूरा नहीं किया गया, इसलिए आने वाले विधानसभा में 35 गांव के किसान विधायक सुखदेव पांसे का भी विरोध करेंगे।

सिंचाई परियोजना से वंचित हुए यह गांव

सिंचाई योजना से वंचित ग्रामों में आष्टा, परसोड़ी, धाबला, बलेगाँव, मीरापूर, रायआमला, सिरसावाड़ी, नरखेड़, गोपालतलाई, प्रभातपट्टन, पाबल, सोमगढ़, चरूड़, तिवरखेड, मंगोनाखुर्द, अमरावती घाट, वंडली, सावंगी, खेड़ीरामोसी, जामगांव, दूतोरा, देवझिरी, डोंगरपूर, वायगाँव, साँईखेड़ा, चकोरा, मासोद, गेहूँबारसा, पिपलपानी एवं सिरड़ी, हिडली और बिरूल गांव शामिल है।
उल्लेखनीय है कि उक्त ग्रामों की सिंचाई हेतू गेहूँबारसा जलाशय, खेड़ीरामोसी जलाशय एवं वर्धा जलाशय पार्ट 2 बनाने के लिए वंचित ग्रामों को जोड़ने के संबंध में ग्राम पंचायतों का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। साथ ही चंदोरा जलाशय से नवीन पद्धति द्वारा पाईप लाईन से जोड़ने के लिए भी शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जबकि वर्ष 2014 में ग्राम आष्टा में किसानों द्वारा विशेष ग्राम सभा लेकर ग्राम आष्टा को नवीन जलाशय के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराये जाने की मांग शासन से की गई है। ग्राम आष्टा एवं विरान राजनी का रकबा विकासखण्ड में सबसे बड़ा है। इसका क्षेत्रफल 1465 हेक्टेयर है। लेकिन यह पूरा रकबा बारिश के पानी पर निर्भर है।

इन्होंने सौंपा ज्ञापन

ज्ञापन सौंपने वालों में नहर लाओ संघर्ष समिति के गुलाबराव देशमुख, भोजू पाटनकर, डॉ. वागद्रे साईंखेड़ा, गुणवंतराव गलफट, प्रहलाद धाकड़, गोविंदराव लिखितकर, साहेबराव भोपते, दुर्गादास माकोड़े, महादेव उकंडे, हेमराज सोलंकी, पुजया देशमुख, महादेव घोड़की, भीमराव देशमुख, कुंडलिक राव पवार सहित अन्य किसान शामिल थे।

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