अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्थानों के शिक्षक वेतन के लिए तरसे
शिक्षकों ने केंद्रीय मंत्री और विधायकों से लगाई न्याय की गुहार

बैतूल। अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षक और कर्मचारी पिछले दो महीनों से वेतन अनुदान ना मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। लोक शिक्षण संचालनालय के कुछ अधिकारियों ने 23 वर्षों के शिक्षण शुल्क की जानकारी संस्थाओं द्वारा न दिए जाने के कारण वेतन अनुदान रोक दिया है। इस स्थिति ने शिक्षकों और उनके परिवारों को अभावग्रस्त जीवन यापन करने पर मजबूर कर दिया है।
शासन के आदेशों के अनुसार 1983-84 से कोई भी शिक्षण संस्था शैक्षणिक शुल्क की राशि नहीं लेगी और इसका पूरी तरह से पालन किया गया है। इसके बावजूद, कुछ संस्थाओं द्वारा जानकारी न दिए जाने का बहाना बनाकर दो महीने से वेतन अनुदान रोक दिया गया है। इस पर शिक्षकों ने सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या किसी जानकारी के अभाव में वेतन रोकना न्यायसंगत है? वेतन न मिलने से न केवल शिक्षक, बल्कि उनके पूरे परिवार आर्थिक बदहाली का सामना कर रहे हैं।

इस गंभीर स्थिति में, अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और कर्मचारी जिले के सांसद और केंद्रीय मंत्री डीडी उइके, विधायक हेमंत खंडेलवाल, आमला विधायक योगेश पंडागरे, भाजपा जिला अध्यक्ष बबला शुक्ला, वरिष्ठ भाजपा नेता मोहित गर्ग, और पूर्व विधायक अलकेश आर्य से मिलकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। शिक्षकों ने अपनी पीड़ा बताई और उनसे न्याय की गुहार लगाई।
सभी जनप्रतिनिधियों ने शिक्षकों को आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही संबंधित अधिकारियों से चर्चा करेंगे और शिक्षकों का लंबित वेतन अनुदान जारी कराने का प्रयास करेंगे। हालांकि, केंद्रीय मंत्री डीडी उइके से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी कारणवश संपर्क नहीं हो पाया। इसके बावजूद, विधायकों ने अपनी ओर से पत्र भेजकर शिक्षकों के प्रति सहानुभूति जताई और वेतन अनुदान जारी करने की अनुशंसा की है।
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ अनुदान प्राप्त के प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश कोषाध्यक्ष नारायण अडलक, नरेंद्र ठाकुर, देवेंद्र पाटिल,संदीप कौशिक देवेंद्र ठाकुर, अजय शुक्ला,मनीष सरसोदे, ललित गंगारे, नवनीत साहू, रामचरण उइके और अन्य शिक्षक शामिल थे। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि इस मुद्दे को प्राथमिकता से हल किया जाए, ताकि शिक्षकों को उनके लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान हो सके और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आ सके।




