Education:छतरपुर प्राचार्य हत्याकांड: शिक्षकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग
नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संगठन ने सौंपा ज्ञापन

बैतूल। कक्षा 12वीं के छात्र द्वारा छतरपुर जिले के धमौरा स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य सुरेन्द्र कुमार सक्सेना की गोली मारकर हत्या ने पूरे शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद शिक्षक समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) की जिला शाखा बैतूल जिलाध्यक्ष रवि सरनेकर, राजेंद्र कटारे ने बताया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाध्यक्ष रवि सरनेकर के नेतृत्व में महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में प्राचार्य सुरेन्द्र कुमार सक्सेना हत्याकांड की न्यायिक जांच कराने और शिक्षकों, कर्मचारियों एवं अधिकारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का विशेष महत्व है, और शिक्षा की प्रगति के लिए शिक्षकों, छात्रों और शिक्षण संस्थानों का सर्वांगीण विकास और संरक्षण आवश्यक है। लेकिन वर्तमान में शिक्षकों और शासकीय कर्मचारियों के लिए असुरक्षा और अभद्र व्यवहार की घटनाओं ने उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि शिक्षकों को छात्रों के ऊपर पूर्ण नियंत्रण का अधिकार दिया जाए ताकि अनुशासन का पालन सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा, शिक्षकों और शासकीय कर्मचारियों के लिए एक ऐसा कानून बनाने की अपील की गई है जिससे वे निर्भय होकर अपने कार्य का निष्पादन कर सकें।
हत्याकांड की न्यायिक जांच की अपील
शिक्षक समुदाय ने प्राचार्य सुरेन्द्र कुमार सक्सेना की हत्या की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। साथ ही, यह सुनिश्चित करने की अपील की गई है कि यह घटना प्रदेश में एक नजीर बने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ज्ञापन में शासकीय संस्थानों की सुरक्षा और शासकीय कार्यों के निष्पादन के दौरान आमजन और जनप्रतिनिधियों के व्यवहार के लिए विशेष कानून लागू करने की मांग की गई है। शिक्षक समुदाय ने यह भी आग्रह किया कि शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए भयमुक्त वातावरण तैयार किया जाए।।ज्ञापन देने वालों में राजेंद्र कटारे, धनराज पाटिल, दिलीप वरवड़े, राजकुमार राठौर, गोकुल झरबड़े, बी आर ठाकरे, श्रीराम बारसे, बी आर पारधे, रवि अतुलकर, आरडी बारपेटे आदि उपस्थित थे।




