ओबीसी जनगणना, यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट और 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट की मांग को लेकर भारत मुक्ति मोर्चा ने किया प्रदर्शन।
23 अप्रैल को भारत बंद की चेतावनी, आंदोलन के तीसरे चरण में बैतूल में अंबेडकर चौक से निकली रैली। भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा का आरोप, कैबिनेट के फैसले के बावजूद जनगणना नोटिफिकेशन में ओबीसी का कॉलम नहीं।

बैतूल। भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के तत्वाधान में ओबीसी जाति आधारित जनगणना में अलग कॉलम जोड़ने, एससी-एसटी-ओबीसी के लिए सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट लागू करने तथा 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग को लेकर सोमवार 23 मार्च को बैतूल में रैली निकालकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। देशभर के 725 जिला मुख्यालयों पर किए जा रहे चरणबद्ध आंदोलन के तीसरे चरण में बैतूल में भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
संगठन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने कैबिनेट में निर्णय के बावजूद जनगणना के नोटिफिकेशन में ओबीसी की जातियों का कॉलम शामिल नहीं किया, जो ओबीसी समाज के साथ धोखाधड़ी है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि जाति आधारित जनगणना में ओबीसी का कॉलम नहीं जोड़ा गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा तथा चौथे चरण में 23 अप्रैल को देशव्यापी भारत बंद किया जाएगा।
कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12 बजे अंबेडकर चौक पर एकत्र होकर महापुरुषों को अभिवादन किया गया। इसके बाद शाम 4 बजे रैली निकाली गई, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची और 4.30 बजे जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर कार्यक्रम का समापन किया गया।
जिला संयोजक एवं अध्यक्ष भारत मुक्ति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष बीआर भूमरकर के अनुसार यह आंदोलन पूरी तरह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और 19(1)(बी) के तहत शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया गया।
संगठन ने बताया कि आंदोलन के पहले चरण में 6 मार्च को 725 जिलों में जिलाधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपे गए थे, जबकि दूसरे चरण में 13 मार्च को जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन किया गया। तीसरे चरण में 23 मार्च को रैली निकालकर ज्ञापन दिया गया है और यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 23 अप्रैल को देशव्यापी भारत बंद किया जाएगा।
रैली और ज्ञापन में प्रमुख रूप से पीरथीलाल भूमरकर, दुर्गा सिंह मर्सकोले, लखन पवार, रूपेश जावलकर, प्रमिला भूमरकर, शिवदास जाऊरकर, डीएस मासोदकर, सुष्मित पिपरदे, तुकाराम लोखंडे, कुंवरलाल आहके, अंतू सिंह मर्सकोले, प्रेम खातरकर, भीमराव भूमरकर सहित अनेक प्रदर्शनकारी उपस्थित थे।




