छात्र आंदोलनों की राजनीति ने दिलाई रोहन सिंह ठाकुर को एनएसयूआई की कमान

बैतूल। एनएसयूआई बैतूल के नए जिलाध्यक्ष के रूप में रोहन सिंह ठाकुर की नियुक्ति संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि लंबे समय से छात्र आंदोलनों में सक्रिय एक कार्यकर्ता के नेतृत्व को मिली औपचारिक पहचान भी मानी जा रही है। वर्षों तक बिना किसी पद के संगठन के लिए सक्रिय रहने वाले रोहन सिंह ठाकुर ने छात्र हितों के मुद्दों को लेकर लगातार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, आंदोलन और ज्ञापन के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। अब संगठन ने उसी सक्रियता पर भरोसा जताते हुए उन्हें जिले की कमान सौंपी है।
रोहन सिंह ठाकुर का राजनीतिक और छात्र नेतृत्व का सफर आंदोलनों से शुरू हुआ। उन्होंने छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई और संगठन का चेहरा बनकर सरकार की छात्र विरोधी नीतियों का विरोध किया। संगठन में किसी पद पर न रहते हुए भी वे जिले में एनएसयूआई की गतिविधियों का प्रमुख चेहरा बने रहे। यही कारण रहा कि जिला अध्यक्ष की दौड़ में उन्हें एक सक्रिय और संघर्षशील कार्यकर्ता के रूप में देखा गया।
जिले की छात्र राजनीति में रोहन सिंह ठाकुर का नाम उस समय प्रमुखता से सामने आया, जब बगडोना शासकीय महाविद्यालय के एक कार्यक्रम में उनकी एबीवीपी के प्रांतीय मंत्री और संगठन मंत्री से तीखी बहस हुई। उस समय कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके तथा जिले के सभी पांच विधायक मौजूद थे। इस घटनाक्रम के बाद वे जिले की छात्र राजनीति में अधिक चर्चित हुए।
उनकी सक्रियता विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रही। बागडोना कॉलेज का नाम सरदार विष्णु सिंह उइके के नाम पर रखने की मांग को लेकर उन्होंने आंदोलन किया। मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर के लिए बीच स्टेडियम में बनाए गए हेलीपैड का विरोध करते हुए उसे हटाने की मांग उठाई, जहां प्रशासन पर खिलाड़ियों को लंबे समय तक गुमराह करने के आरोप भी लगे। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को शासकीय आईटीआई की स्थापना के लिए ज्ञापन सौंपने के बाद मंच से इसकी घोषणा हुई। वहीं पाथाखेड़ा के जर्जर पशु चिकित्सालय के पुनर्निर्माण और पशु चिकित्सक की नियुक्ति की मांग को लेकर भी उन्होंने लगातार आवाज उठाई, जिसके बाद वहां नए पशु चिकित्सालय का निर्माण हुआ।
रोहन सिंह ठाकुर की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब एनएसयूआई जिले में संगठनात्मक विस्तार और छात्र राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आंदोलनों से पहचान बनाने वाले रोहन सिंह ठाकुर संगठन को कितना मजबूत कर पाते हैं और छात्र हितों के मुद्दों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।




