धार्मिक व मांगलिक कार्यक्रमों में घटा शराबखोरी का उपद्रव । सर्व समाज की पहल से दिखने लगा असर । गोंड, गवली, कोरकू, कुनबी, मेहरा समाज एक मंच पर।

बैतूल। जिले के सामाजिक इतिहास में पहली बार गोंड समाज, गवली समाज, कोरकू समाज, कुनबी समाज, मेहरा समाज सहित विभिन्न समाजों के सामाजिक नेतृत्वकर्ता शराबबंदी के मुद्दे पर एक मंच पर एकजुट हुए हैं। सर्व समाज संयुक्त मोर्चा द्वारा शुरू किए गए इस सामूहिक अभियान के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं और जिले में चल रहे धार्मिक एवं मांगलिक कार्यक्रमों में पहले की तुलना में शराब पीकर उत्पात मचाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है।

समाज में बढ़ती शराबखोरी से उत्पन्न अपराध, सड़क दुर्घटनाओं, पारिवारिक कलह और युवाओं के भविष्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को देखते हुए सर्व समाज संयुक्त मोर्चा द्वारा यह पहल शुरू की गई थी। अब इसके प्रभाव से सामाजिक आयोजनों में अनुशासन और शांति का माहौल बनता नजर आ रहा है, जिसे समाज के वरिष्ठजन भी सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।

संयुक्त मोर्चा से जुड़े विभिन्न समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर सख्त कार्रवाई करने, सार्वजनिक स्थलों पर शराब सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा प्रभावी शराबबंदी लागू करने की मांग की है।

समाज के वरिष्ठजनों और नेतृत्वकर्ताओं का कहना है कि शराब केवल एक व्यक्ति को ही नहीं पूरे परिवार और समाज को विनाश की ओर ले जाती है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस बुराई पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका गंभीर दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा।

समाज प्रमुखों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी एक समाज या वर्ग का नहीं बल्कि सर्व समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि शराब के दुष्प्रभावों को समझते हुए इस सामाजिक बुराई के खिलाफ प्रशासन और समाज संगठनों का सहयोग करें। सर्व समाज संयुक्त मोर्चा की यह पहल सामाजिक सुधार, शांति और सुरक्षित समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

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