175 वर्षों की गुरु-शिष्य परंपरा से आलोकित हुई खेडीकोर्ट की तपोभूमि
भय और अस्थिरता के दौर में खेडीकोर्ट से मिल रहा गुरु-मार्ग का संदेश

बैतूल। तापी अंचल की तपोभूमि ग्राम खेडीकोर्ट में आयोजित मां बगलामुखी त्रिकालदर्शी दिव्य दरबार का पंचम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना के वातावरण में संपन्न हुआ। आयोजन में क्षेत्र सहित दूर-दराज से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर गुरु मां के दिव्य मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त किया। पंचम दिवस भी दरबार स्थल पर भक्तों की निरंतर उपस्थिति बनी रही।
दरबार की विशेषता यह रही कि श्रद्धालुओं को बिना जन्मतिथि और बिना जन्मकुंडली के गुरु मां द्वारा दिव्य दृष्टि से सटीक मार्गदर्शन प्रदान किया गया, जिससे अनेक भक्त भावविभोर होकर मानसिक शांति और संतोष का अनुभव करते दिखाई दिए।
मां बगलामुखी साधक रविन्द्र मानकर गुरुजी ने बताया कि मां ताप्ती के पावन अंचल में स्थित ग्राम खेडीकोर्ट की यह भूमि विगत लगभग 175 वर्षों से गुरु-शिष्य परंपरा की दिव्य ऊर्जा से आलोकित रही है। यही वह पुण्यभूमि है जहां संत गुरु गोरखनाथ वारल्याजी महाराज, संत श्री मदनगिरी जी महाराज एवं संत श्री श्यामगिरी जी महाराज ने कठोर तपस्या कर इस अंचल को आध्यात्मिक चेतना से समृद्ध किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय भय, अंधकार, मानसिक अस्थिरता और सामाजिक विघटन का दौर है, जहां गुप्त शत्रुओं के षड्यंत्र और बढ़ती आपदाओं से जनमानस चिंतित है। ऐसे समय में गुरु ही वह दिव्य माध्यम हैं, जो ऋषि-पद्धति और सनातन परंपरा के माध्यम से मानव जीवन को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं।
इसी क्रम में मां ताप्ती के इस पावन अंचल में मां बगलामुखी की परम साधिका दिव्य विभूति गुरु मां देवी ज्ञानेश्वरी जी गोस्वामी का आगमन 31 जनवरी 2026 को हुआ। आयोजन के पाँचवें दिन भी गुरु मां द्वारा श्रद्धालुओं के जीवन में आने वाली बाधाओं, संकटों और समस्याओं का निरंतर समाधान किया गया। परम तेजस्वी, त्रिकालदर्शी और दिव्यदृष्टा गुरु मां देवी ज्ञानेश्वरी जी गोस्वामी केवल अपनी दिव्य दृष्टि से सटीक फलादेश कर रही हैं।
आयोजन समिति के सदस्य देवशंकर ने बताया कि गुरुमाँ विगत 30 वर्षों से मां बगलामुखी देवी की उपासना कर रही हैं और सवा लाख बीज मंत्र के अनेक अनुष्ठान तथा कुंडलिनी योग साधनाए पूर्ण कर चुकी हैं। आयोजन समिति के सदस्य एवं मां बगलामुखी उपासक वासुदेव ताड़गे ने बताया कि अंग्रेज़ी शासनकाल में यहां न्यायालय की स्थापना होने के कारण ग्राम खेडी का नाम खेडीकोर्ट पड़ा। आज खेडीकोर्ट अपने ऐतिहासिक गौरव और सशक्त आध्यात्मिक वर्तमान के साथ तापी अंचल में एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।




