कोरकू समाज की सांस्कृतिक विरासत, सामूहिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन।
कालापानी में संपन्न हुआ चिटकोरा, लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों ने बांधा समां।

बैतूल। आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश देते हुए आदिवासी महापंचायत के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रम चिटकोरा का भव्य आयोजन 31 मई रविवार को शाहपुर ब्लॉक के ग्राम कालापानी में संपन्न हुआ। कोरकू समाज के इस पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए तथा पारंपरिक वेशभूषा में सामूहिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया।
चिटकोरा कार्यक्रम मूल रूप से आदिवासी कोरकू समाज का पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें समाज के लोग अपनी लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों, लोकगीतों और सामूहिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी समृद्ध विरासत को जीवंत करते हैं। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों और समाजजनों ने सामूहिक प्रस्तुतियां देकर सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।
– जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में आदिवासी ब्लॉक अध्यक्ष शाहपुर संदीप बारस्कर, ग्राम पंचायत सालीमेट के सरपंच वीरेंद्र प्रताप बारस्कर, जिला पंचायत सदस्य विलकिस बारस्कर तथा लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री झामसिंह बारस्कर विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने समाज की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने के प्रयासों की सराहना की।
– समाज के वरिष्ठजन और जनप्रतिनिधि हुए शामिल
आयोजन में ग्राम पंचायत झापड़ी के सरपंच रामप्रसाद काजले, पप्पू यादव, पूर्व सरपंच खापा किसनलाल बारस्कर, राजकुमार लोखंडे, राधेश्याम यादव, प्रेमलाल यादव, संजू यादव, नितेश यादव, टिमरनी के सरपंच रंजित कलमें, ढोडरामऊ के सरपंच रामेश्वर अखण्डे तथा उपसरपंच बिसराम काजले सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और समाज के गणमान्य नागरिकों की सहभागिता रही।
– लोक कलाकारों ने बांधा समां
कार्यक्रम में गायक रामचरन बारस्कर, तुलसीराम बारस्कर, राजेश लोखंडे तथा चिटकोरा मंडल हांडीपानी एवं धारनमऊ के गायक सुभाष चौहान ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों को उपस्थित समाजजनों ने खूब सराहा।
– सांस्कृतिक एकता का दिया संदेश
कार्यक्रम में अर्जुन काजले, कमल बारस्कर, अशोक बारस्कर, मीडिया प्रभारी बंशीलाल शैलूकर, जनपद सदस्य नेहरू मवासे, कछार पंचायत के सरपंच सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। आयोजन ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक एकजुटता, परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक समरसता का प्रभावी संदेश दिया।




