शब्दांजलि । माता-पिता की ओर से।

प्रिय सुरभि।

तुम आज भी यादों में जीवित हो। “सहयोग” तुम स्वर्गवासी हो गईं तो ऐसा लगा मानो बेटी की विदाई हो गई हो। क्या कोई इस तरह भी माता-पिता के आंगन से विदा होता है। जब तुम घर-आंगन में थीं, तब ऐसा लगता था जैसे सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती हमारे साथ विराजमान हों। तुम्हारे जाने से हमारी दुनिया सूनी और पराई सी हो गई है, बेटी।

दुख अपार है, तुम्हारी यादें हर पल हमारे आसपास हैं। फिर भी यही विश्वास है कि परमात्मा के “सहयोग” रूपी आशीर्वाद से अब तुम्हारा वास उनके चरणों में है। हमारी दुआओं का साथ तुम्हारे साथ हमेशा रहेगा, और यही कामना है कि उस दुनिया में भी तुम सुखी रहो। यही हम सबका आशीर्वाद है।

तुम्हारे अपने

प्रिय माता-पिता

श्रीमती रितु हेमंत खंडेलवाल

लेखक

विजय के. वर्मा

अध्यक्ष

सहयोग संगीत फाउंडेशन, बैतूल

मो. 9826330803

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