पंचशील बौद्ध गाथा के साथ सामाजिक जन कल्याण समिति ने मनाई अंबेडकर जयंती ।
अंबेडकर जयंती पर जुटे जनप्रतिनिधि व समाजजन, माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि ।

बैतूल। सामाजिक जन कल्याण समिति द्वारा डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 135वीं जन्म दिवस अंबेडकर चौक बैतूल में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पंचशील बौद्ध गाथा के साथ हुई, इसके बाद अंबेडकर की प्रतिमा पर समिति के अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों ने माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में आमला विधायक डॉ.योगेश पंडाग्रे विशेष रूप से उपस्थित रहे। आयोजन में सामाजिक जन कल्याण समिति के संरक्षक एनके मांडवे, संजय जौनजारे, अध्यक्ष सूरजलाल मंडलेकर, सचिव शिवदयाल चौकीकर, कोषाध्यक्ष अजाबराव भूमरकर सहित सामाजिक जन कल्याण महिला संगठन की अध्यक्ष श्रीमती चंद्रप्रभा चौकीकर, सचिव कंचन भूमरकर, कोषाध्यक्ष वृंदा नागले सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
समारोह में दयाराम झरबड़े, माणिकराव कापसे, नत्थू प्रसाद चौकीकर, गुलाबराव अडलक, पंजाबराव भालेकर, एसआर वाईकर, रामदास पंडाग्रे, विमल झरबड़े, कृष्ण राव उबनारे, मानक प्रसाद वाईकर, बुधराव वाईकर, पवन यादव, द्वारका प्रसाद बिसंदरे, रामभरोस पूर्वे, सरजेराव पाटिल, गणपत पाटिल, नारायण खातरकर, कृष्णा सातनकर, यादोराव खातरकर, रामदयाल मासोदकर, रघुनाथ चौरसिया, रामकिशोर कापसे, श्रीमती संगीता उबनारे, प्रकाश उबनारे, सुखराम निरापुरे, रामशंकर आंवलेकर, ओमप्रकाश खातरकर, बाबूराव उबनारे, नामदेव सातनकर, बाबूराव शेषकर, एनआर धोटे, एन चौरसिया, करणलाल चंदेलकर, तुकाराम लोखंडे, सुशीला नागले, सया चौकीकर, पंजाबराव पाटिल, मूलचंद नागले, गंभीर पाटिल, कैलाश पाटिल, सुखदेव भालेकर, केआर डोंगरे, जीआर राजूरकर, रमेश उबनारे, भीमराव चौकीकर, लीलाधर नागले, श्रीमती जयवंती भूमरकर, पांडुरंग वरवड़े, मुकुंद चंदेल, गंगाबाई वाईकर, उदय वर्मा, कुसना डोंगरे सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी सदस्य सफेद वस्त्र धारण कर अनुशासन और एकता का संदेश देते नजर आए।
कार्यक्रम के दौरान बूंदी का प्रसाद वितरण किया गया। समापन अवसर पर समिति अध्यक्ष द्वारा संबोधन दिया गया, जबकि डॉक्टर योगेश पंडाग्रे, शिवदयाल चौकीकर, डीआर झरबड़े, माणिकराव कापसे, नत्थू प्रसाद चौकीकर, एसआर वाईकर, प्रकाश उबनारे, मानक प्रसाद वाईकर और अजाबराव भूमरकर सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह का समापन गरिमामय वातावरण में हुआ।





