नदी को नाला और नालों को नालियां बना दिया।
बैतूल शहर के नालों पर अतिक्रमण का आरोप, शिवसेना ने बड़े खुलासे की दी चेतावनी । बरसात से पहले नालों पर कब्जों का मुद्दा गरमाया।

बैतूल। बरसात से पहले बैतूल शहर में नालों पर अतिक्रमण का मुद्दा गरमाने लगा है। शिवसेना जिला अध्यक्ष विजेंद्र गोले ने शहर के कई प्रमुख नालों पर पूंजीपति वर्ग और प्रभावशाली लोगों द्वारा कब्जा किए जाने के गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। शिवसेना का आरोप है कि वर्षों से शहर के प्राकृतिक जल निकासी मार्गों को लगातार संकरा किया जा रहा है, लेकिन धनाढ्य वर्ग के दबाव के चलते प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा।
विजेंद्र गोले ने आरोप लगाया कि बैतूल शहर में हाथी नाला, दादाबाड़ी के सामने स्थित नाला, वेदिका फर्नीचर के पीछे का नाला तथा गंज माता मंदिर क्षेत्र का नाला सहित कई स्थानों पर अतिक्रमण कर नालों को नालियों में तब्दील किया जा रहा है। उनका कहना है कि शहर की पुरानी जल निकासी व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है और इसका खामियाजा आम जनता को आगामी बरसात में भुगतना पड़ेगा।
शिवसेना जिला अध्यक्ष ने कहा कि बैतूल शहर की स्थिति यह हो गई है कि नदी को नाला और नालों को नाली बना दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश अतिक्रमण पूंजीपति वर्ग और राजनीतिक पकड़ रखने वाले प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए हैं, जिसके कारण प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों पर कार्रवाई हो सकती है तो बड़े लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।

विजेंद्र गोले ने चेतावनी दी कि शिवसेना जल्द ही ऐसे प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक दलों से जुड़े पदाधिकारियों के नाम सार्वजनिक करेगी जिन्होंने नालों पर कब्जा कर रखा है। उन्होंने कहा कि शिवसेना इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी और शहर के नालों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए आंदोलनात्मक रणनीति तैयार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नालों की सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई तो बरसात के दौरान शहर के कई क्षेत्रों में जलभराव और जनजीवन प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। शिवसेना ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कर नालों को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग की है।




