भीषण गर्मी में बच्चों को हीट स्ट्रोक से बचाएं।
डॉ. नवीन वागद्रे

गर्मी के मौसम में तापमान तेजी से बढ़ने के कारण बच्चों में डिहाइड्रेशन, उल्टी, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। विशेष रूप से स्कूल जाने वाले बच्चों को इस मौसम में अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है। अप्रैल–मई के महीनों में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है, तब शरीर के लिए सामान्य तापमान बनाए रखना कठिन हो जाता है। शरीर पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता है, लेकिन जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तब हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
हीट स्ट्रोक के दौरान बच्चों में बुखार, चक्कर आना, उल्टी, कमजोरी, त्वचा का सूखा होना, हाथ-पैर ठंडे पड़ना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत ध्यान देना आवश्यक है। बचाव के लिए बच्चों को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप में बाहर न जाने दें और स्कूलों में भी उनके लिए पर्याप्त छाया और ठंडे वातावरण की व्यवस्था होनी चाहिए। बच्चों को हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनाएं तथा उन्हें बार-बार पानी पीने के लिए प्रेरित करें।
नैचुरोपैथी के अनुसार गर्मी में केवल बाहर से ठंडक देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा रखना भी जरूरी है। इसके लिए नारियल पानी, नींबू पानी (शहद या गुड़ के साथ), बेल का शरबत, आम पन्ना, सौंफ का पानी, छाछ (जीरा और हल्के नमक के साथ) जैसे प्राकृतिक पेय बहुत लाभकारी होते हैं। ये पेय शरीर में जल की कमी को पूरा करते हैं और अंदर से ठंडक प्रदान करते हैं। इसके साथ ही शीतली और शीतकारी प्राणायाम जैसी श्वास तकनीकें भी शरीर का तापमान कम करने और मन को शांत रखने में सहायक होती हैं। बच्चों को सरल तरीके से 5–10 मिनट तक इनका अभ्यास कराया जा सकता है।
यदि बच्चे को गर्मी के कारण परेशानी होने लगे तो उसे तुरंत ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं, शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी या ओआरएस दें। यदि बच्चा बेहोश हो जाए या तेज बुखार हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है। थोड़ी सी सावधानी, सही खान-पान और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर बच्चों को हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या से बचाया जा सकता है।




