MP News:हाईकोर्ट ने वकीलों की हड़ताल को अवैधानिक करार दिया, काम पर लौटने के आदेश
MP News: High Court declares lawyers' strike illegal, orders to return to work

MP News: मध्यप्रदेश में चल रही वकीलों की हड़ताल को लेकर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। मप्र हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने स्वतः संज्ञान लेकर पीआईएल दर्ज कर अधिवक्ताओं की हड़ताल को अवैधानिक करार दिया। हाई कोर्ट ने शुक्रवार को राज्यव्यापी हड़ताल पर स्वत: संज्ञान लेकर सभी अधिवक्ताओं को आदेश दिए कि वे तत्काल काम पर लौटें।
चीफ जस्टिस रवि मलिमठ व जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने 10 पृष्ठीय विस्तृत आदेश में कहा है कि यदि इसका पालन नहीं हुआ तो इसे अवज्ञा माना जाएगा और उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि इस आदेश की प्रति के साथ स्टेट बार काउंसिल के चेयरमैन, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जबलपुर, इंदौर व ग्वालियर) के अध्यक्ष, हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन जबलपुर के अध्यक्ष के अलावा प्रदेश भर के जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्षों को नोटिस जारी करें।
हाई कोर्ट ने कहा कि जिस तरह बातें सामने आई हैं, उससे हम बेहद हैरान, चिंतित और दुखी हैं। स्टेट बार का पत्र मिलने के बाद जवाब दिया गया था और स्टेट बार के चेयरमैन व सदस्यों से कहा था कि मुद्दों को चीफ जस्टिस के समक्ष विचार के लिए रखें। ऐसा करने के बजाय चेयरमैन ने राज्यव्यापी हड़ताल की घोषणा कर दी। इसके अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने भी 23 मार्च को स्टेट बार के चेयरमैन को पत्र लिखकर तत्काल हड़ताल वापस लेने के निर्देश दिए थे, जिसका पालन भी नहीं किया गया। जनहित व पक्षकारों के हित में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट द्वारा एक वर्ष में पुराने 100 प्रकरणों की सुनवाई करने के लिए आदेश दिए हैं। इससे तीन माह में 25 प्रकरणों की अनिवार्यता हो गई है। ऐसे में बार-बार पेशी पर जाने की परेशानी का हवाला देकर वकीलों के द्वारा इस अनिवार्यता को खत्म करने की मांग की जा रही है। वर्तमान में सभी वकील 25 मार्च तक हड़ताल पर हैं। इसके बाद की रणनीति 26 मार्च को राज्य स्तर पर आयोजित की जाने वाली बैठक में बनाई जाएगी।




