हरण्या में अतिक्रमण के खिलाफ बेअसर प्रशासन।

राजस्व आदेश का नहीं हो रहा पालन। पुलिस बल नहीं मिलने से अटकी बेदखली।

बैतूल। आमला तहसील के ग्राम हरण्या में करोड़ों रुपए की शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और अवैध प्लॉटिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राजस्व न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद भी मौके पर कार्रवाई नहीं होना, और पुलिस बल उपलब्ध न कराया जाना, पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों की शिकायत, राजस्व आदेश और जनप्रतिनिधियों की मांग के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे गांव में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

– आदेश जारी, फिर भी कार्रवाई नहीं

राजस्व प्रकरण क्रमांक 0025/31-68 वर्ष 2025-26 में नायब तहसीलदार बोरेदेही द्वारा 17 अप्रैल 2026 को खसरा नंबर 47/1/1 और 47/1/2 की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने का स्पष्ट आदेश जारी किया गया था। इसके बाद 23 अप्रैल को न्यायालय तहसीलदार आमला द्वारा संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए 25 अप्रैल को मौके पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए। आदेश में पुलिस बल उपलब्ध कराने और पंचनामा प्रस्तुत करने तक के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद आज तक जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया।

– करीब 16 लोगों ने किया कब्जा

दस्तावेजों और शिकायत के अनुसार कमला पति हेमराज सहित करीब 16 लोगों द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध रूप से मकान बनाकर कब्जा कर लिया गया है। राजस्व न्यायालय ने इन्हें बेदखल करने के आदेश दिए, लेकिन आदेश का पालन नहीं होने से अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रशासनिक आदेशों का पालन कराने में बाधा कहां है।

– करोड़ों की जमीन पर अवैध प्लॉटिंग का आरोप

मामला सिर्फ अतिक्रमण तक सीमित नहीं है, ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि ग्राम पंचायत हरण्या की शासकीय भूमि, जो मुख्य मार्ग बोरदेही-बैतूल पर स्थित है और रेलवे स्टेशन बोरदेही के पास होने के कारण अत्यंत कीमती है, उस पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार इस जमीन का बाजार मूल्य करोड़ों में है और इसे व्यवसायिक रूप से बेचा जा रहा है।

– सरपंच, सचिव और पटवारी पर मिलीभगत के आरोप

ग्रामीणों ने जनसुनवाई में दिए गए ज्ञापन में वर्तमान सरपंच सचिन साहू, सचिव परमानंद पुण्डे और हल्का पटवारी अमित राठौर पर आपसी मिलीभगत से शासकीय भूमि को अवैध रूप से बेचने के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि बिना शासन की अनुमति के प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं और ग्रामीणों से मोटी रकम वसूली जा रही है। यहां तक कि बाहरी लोगों, सरकारी नौकरी में लगे व्यक्तियों और संपन्न लोगों को भी लाखों रुपए लेकर प्लॉट दिए जाने की बात सामने आई है।

– भोले-भाले ग्रामीणों से ठगी

ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले में भोले-भाले लोगों को ऊंचे दामों पर जमीन देकर ठगा जा रहा है, जबकि शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद पटवारी द्वारा तहसील न्यायालय को जानकारी दी गई, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई जमीन पर नजर नहीं आ रही।

– पूर्व विधायक और किसान संघर्ष समिति ने उठाई आवाज

किसान संघर्ष समिति के तहसील अध्यक्ष दिनेश यदुवंशी ने इस पूरे मामले को उठाते हुए बताया कि समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने कलेक्टर को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि राजस्व न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाए और अतिक्रमण हटाया जाए।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब राजस्व न्यायालय आदेश दे चुका है, कार्रवाई की तारीख तय हो चुकी है और पुलिस बल की मांग भी की गई है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्या पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया गया या फिर प्रशासनिक स्तर पर ही उदासीनता बरती जा रही है, यह अब जांच का विषय बन गया है।

– ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

समस्त ग्रामवासी हरण्या ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आमला को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क पर उतरकर चक्का जाम और भूख हड़ताल की जाएगी। ग्रामीणों ने दोषी सरपंच, सचिव और पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की है।

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