Corruption News : भ्रष्टाचार के कीड़े 16 साल में चाट गए करोड़ों की सब्सिडी
Corruption worms licked subsidy worth crores in 16 years
कौतूहल बना मुद्दा, आखिर किसने डकारी करोड़ों की सब्सिडी

बैतूल। सत्ता पर बैठे नेता और नौकरशाह मिल बैठ कर घोटालों की किस तरह लीपापोती करते हैं, उसे जानना भी कम रोचक नहीं है। बैतूल जिले में जो सब्सिडी घोटाला पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से लगातार चल रहा था, उसका भांडा कांग्रेस विधायक निलय विनोद डागा के विधानसभा प्रश्न से फूटा। विधायक श्री डागा ने दावा किया है कि शिकायत सही अधिकारी के हाथ लग गई और उसकी जांच करा दी गई तो इस जांच से ही भारी-भरकम घोटाले की परतें उधड़ने लगेंगी। श्री डागा ने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश को रोजगार के क्षेत्र में समृद्ध बनाने के लिए कई तरह से मदद करने का दावा कर रही है, लेकिन यह उद्योग विभाग के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। 16 साल के भीतर लगभग 500 करोड़ से ज्यादा के भ्रष्टाचार का अनुमान है।
शिवराज जी! यह घोटाला नहीं दिख रहा आपको!
विधायक डागा ने बताया कि उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान प्रश्न लगा कर छोटे, मध्यम एवं बड़े उद्योग स्थापित किए जाने की योजना, नियम व शर्ते क्या-क्या है ? योजना की नियमावाली सहित बैतूल जिले अन्तर्गत वर्ष 2008 से प्रश्न दिनांक तक कितने छोटे, मध्यम एवं बड़े उद्योग स्थापित किए गए है, इसकी जानकारी ग्रामवार, पट.ह.नं. खसरा नं. सहित उद्योगवार उद्योगपतियों के नाम व पता सहित उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। विधानसभा प्रश्न में उन्होंने स्पष्ट तौर पर वर्ष 2008 से प्रश्न दिनांक तक की जानकारी मांगी थी, लेकिन उनके प्रश्न को बड़ी ही चालाकी से बदल दिया गया। सरकार द्वारा प्रश्न बदलकर 2018 से अब तक की जानकारी दी जा रही है, उसमें भी कई महत्वपूर्ण तथ्य ऐसे हैं जो भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए काफी है। श्री डागा ने कहा कि भाजपा सरकार की नीति और नियत सही है तो वह उद्योगों से संबंधित ग्रामवार पटवारी हल्का व खसरे की जानकारी देने से क्यों डर रही है।
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घोटाले का पटाक्षेप कर देने पर आतुर उद्यम मंत्री

श्री डागा ने आरोप लगाया कि नेता, नौकरशाह और उद्योग विभाग के अधिकारी मिल कर घपला करते रहे हैं। इस पर कोई रोक नहीं है। जांच के नाम पर लीपापोती होती है और घोटाला जारी रहता है। यह इतना विकराल है कि सीबीआई जैसी विशेषज्ञ एजेंसी ही इसकी जांच कर सकती है। लेकिन उन सिफारिशों को सत्ता-व्यवस्था अंगूठा दिखाती रहती है। उद्योग विभाग की नसों से वाकिफ लोगों का कहना है कि सब्सिडी घोटाला पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से हो रहा है, लेकिन सत्ता-व्यवस्था को इसकी कोई फिक्र नहीं है। घोटालों की जांच कराने के बजाय दबाने की कोशिशें हो रही हैं। सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री घोटाले का हमेशा-हमेशा के लिए पटाक्षेप कर देने पर आतुर हैं। उनका कहना है कि विभाग द्वारा औद्योगिक इकाई की ग्रामवार पटवारी हल्का नम्बर तथा खसरे की जानकारी संकलित नहीं की जाती है।
ये है विधायक डागा के पोल खोल प्रश्न
क्या औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि :-
(क) छोटे, मध्यम एवं बड़े उद्योग स्थापित किए जाने की योजना, नियम व शर्ते क्या-क्या है ? योजना व नियमावाली की प्रति उपलब्ध करावें । (ख) बैतूल जिले अन्तर्गत वर्ष 2008 से प्रश्न दिनांक तक कितने छोटे, मध्यम एवं बड़े उद्योग स्थापित किए गए है ? जानकारी ग्रामवार, पट.ह.नं. खसरा नं. सहित उद्योगवार उद्योगपतियों के नाम व पता सहित उपलब्ध करावें ।
(ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार स्थापित उद्योगों को किन-किन योजना, नियम व शर्तो के अधीन स्थापित कराया गया है ? स्थापित उद्योगों की लागत क्या है ? उद्योगपतियों द्वारा उद्योग स्थापित किए जाने हेतु किस बैंक से ऋण लिया गया ओर कितनी राशि का ? बैंक ऋण का जमानतदार कौन-कौन है ? स्थापित उद्योगों को केन्द्रांश/ राज्यांश द्वारा कितनी कितनी राशि की सब्सिडी किन-किन उद्योगपतियों को प्रदान की गई है ? जानकारी पथक-पृथक उद्योगपतियों के नाम, पते व मोबाईल नम्बर, उद्योग की लागत, सब्सिडी की राशि एवं जमानतदार के नाम सहित उपलब्ध कराएं।
बैतूल जिले में स्थापित उद्योग
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
18. (क्र. 978 ) निलय विनोद डागा क्या सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छोटे, मध्यम एवं बड़े उद्योग स्थापित किए जाने की योजना, नियम व शर्तें क्या क्या है? योजना व नियमावाली की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) बैतूल जिले अन्तर्गत वर्ष 2018 से प्रश्न दिनांक तक कितने छोटे, मध्यम एवं बड़े उद्योग स्थापित किए गए हैं? जानकारी ग्रामवार, पट.ह.नं. खसरा नं. सहित उद्योगवार उद्योगपतियों के नाम व पता सहित उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्नाथ (ख) अनुसार स्थापित उद्योगों को किन-किन योजना, नियम व शर्तों के अधीन स्थापित कराया गया है? स्थापित उद्योगों की लागत क्या है? उद्योगपतियों द्वारा उद्योग स्थापित किए जाने हेतु किस बैंक से ऋण लिया गया और कितनी राशि कार बैंक ऋण का जमानतदार कौन-कौन है? स्थापित उद्योगों को केन्द्रांश/राज्यांश द्वारा कितनी कितनी राशि की सब्सिडी किन-किन उद्योगपतियों को प्रदान की गई है? जानकारी पृथक-पृथक उद्योगपतियों के नाम, पते व मोबाईल नम्बर, उद्योग की लागत, सब्सिडी की राशि एवं जमानतदार के नाम सहित उपलब्ध कराएं।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री का जवाब
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( ओमप्रकाश सखलेचा) (क) विभाग द्वारा उद्योगों की स्थापना हेतु प्रोत्साहित किया जाता है। इकाइयों को मध्यप्रदेश एम. एस. एम. ई. को औद्योगिक भूमि तथा भवन आवंटन एवं प्रबंधन नियम 2021 अन्तर्गत रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने तथा मध्यप्रदेश एम.एस.एम.ई. प्रोत्साहन योजना 2021 अन्तर्गत अनुदान प्रदाय किया जाता हैं। वर्तमान में प्रचलित मध्यप्रदेश एम. एस.एम.ई. प्रोत्साहन योजना 2021 एवं मध्यप्रदेश एम. एस.एम.ई. को औद्योगिक भूमि तथा भवन आवंटन एवं प्रबंधन नियम 2021 की नियमावली की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ एवं ‘ब’ अनुसार हैं। (ख) बैतूल जिले में वर्ष 2018 से प्रश्न दिनांक तक विभाग के अधीन औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित इकाइयों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स अनुसार है। विभाग द्वारा औद्योगिक इकाई की ग्रामवार पटवारी हल्का नम्बर तथा खसरे की जानकारी संकलित नहीं की जाती है। (ग) औद्योगिक क्षेत्र में प्रचलित मध्यप्रदेश एम.एस.एम.ई. को औद्योगिक भूमि तथा भवन आवंटन एवं प्रबंधन नियम 2021 प्रभावशील है। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-द अनुसार है तथा बैंक ऋण के जमानतदार संबंधी जानकारी ऋण उपलब्ध कराने वाली वित्तीय संस्थाओं से संबंधित हैं।




