मुलताई की पवित्र धरा पर होगा शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का आगमन
सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग पूजन में होंगे शामिल

– 12 से 18 जून तक होंगे धार्मिक आयोजन, 15 जून को आएंगे शंकराचार्य
बैतूल। धार्मिक ऐतिहासिक पुरातन नगरी मुलताई में पहली बार जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज का आगमन होने जा रहा है। सूर्य पुत्री मां ताप्ती के उद्गम स्थल पर आयोजित सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग पूजन एवं सूर्य महायज्ञ महोत्सव में वे विशेष रूप से शामिल होंगे और मां ताप्ती भक्तों को अपने आशीर्वचनों से कृतार्थ करेंगे। यह भव्य आयोजन 12 से 18 जून तक मां ताप्ती तीर्थ श्रीक्षेत्र में सूर्य महायज्ञ सहित कई धार्मिक आयोजन होंगे। 15 जून को शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का आगमन मुलताई की पवित्र धरा पर होगा।
भोपाल स्थित मठ में मां ताप्ती उद्गम उद्धार महोत्सव समिति के सदस्यों ने परम् पूज्य शंकराचार्य जी से भेंट कर मुलताई में आयोजित होने वाले महायज्ञ और पूजन कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा प्रस्तुत की। शंकराचार्य जी ने समिति के सदस्यों को मार्गदर्शन प्रदान करते हुए आयोजन को सफल बनाने हेतु शुभकामनाएं दीं। समिति के सदस्य गोलू उघड़े ने जानकारी दी कि यह पहला अवसर होगा जब बैतूल जिले के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मुलताई में शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी का आगमन हो रहा है।
शंकराचार्य जी से आशीर्वाद लेने के लिए समिति के सदस्य गोलू उघड़े, दीपक मालवीय, दिनेश कालभोर, पंकज तुमाने, प्रतीक गलफट, लोकश यादव, मयूर सोनी, इशान परसाई, पवन मालवीय, गगन साहू, महेंद्र साहू और शुभम पंडागरे भोपाल पहुंचे थे। पश्चिमाम्नाय द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज ने सभी को स्नेहाशीर्वाद प्रदान करते हुए मां ताप्ती तीर्थ में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होने का आमंत्रण स्वीकार किया।
– ताप्ती किनारे जन्म लेना हमारा सौभाग्य
मां ताप्ती भक्त दीपक मालवीय ने बताया कि धार्मिक दृष्टि से मुलताई एक अत्यंत पवित्र नगरी है जिसका प्राचीन नाम मूलतापी रहा है। यह नाम तापी नदी के उद्गम या मूलस्थान होने के कारण पड़ा। यहां के मंदिर, मठ और धार्मिक स्थल ऐतिहासिक व पुरातन महत्व के हैं। उन्होंने कहा कि ताप्ती नदी के किनारे बसे इस नगर में हम सभी का जन्म लेना हमारा सौभाग्य है। मां ताप्ती के आशीर्वाद से मुलताई में यह ऐतिहासिक और दिव्य आयोजन संभव हो रहा है, जिसमें पहली बार शंकराचार्य जी का पावन गुरुदर्शन क्षेत्रवासियों को प्राप्त होगा।
धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला में मुलताई की पहचान और अधिक समृद्ध होगी तथा आस्था की गंगा पुनः प्रवाहित होगी। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से आह्वान किया है कि अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालु इन आयोजनों में सम्मिलित होकर पुण्यलाभ अर्जित करें।




