सिख धर्म के पहले गुरु के 555वें प्रकाश पर्व पर शुभकामनाएं

हर्षद बजाज, बैतूल मप्र 

“वाहेगुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह।” गुरु पूरब के पावन अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई। सिख धर्म के महान प्रवर्तक, प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी की 555वीं जयंती पर समर्पण और श्रद्धा का यह पर्व पूरे देश में कार्तिक पूर्णिमा के दिन उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। इस दिन को “प्रकाश पर्व” के रूप में भी मनाया जाता है, जो गुरु नानक देव जी के दिव्य ज्ञान और उनके संदेश को स्मरण करने का अवसर है।

गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल, 1469 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था, जिसे आज ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है और यह पाकिस्तान में स्थित है। बचपन से ही गुरु नानक जी सांसारिक मोह-माया से दूर रहते थे और उनका अधिकतर समय सत्संग और आध्यात्मिक चिंतन में बीतता था। उन्होंने अपनी जीवन यात्रा में कई चमत्कारिक घटनाएं दिखाईं, जिन्हें देखकर लोग उन्हें दिव्य आत्मा मानने लगे।

गुरु नानक जी ने मूर्ति पूजा और बहुदेवोपासना को अनावश्यक बताया और दोनों हिंदू तथा मुस्लिम धर्मों पर अपने विचारों का गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने “इक ओंकार” का नारा दिया, जिसका अर्थ है कि ईश्वर एक है और वह हर स्थान पर मौजूद है। गुरु नानक देव जी ने प्रेम, समानता और सेवा के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया, जो सिख धर्म की नींव बने।

गुरु नानक देव जी के जीवन की एक प्रसिद्ध घटना है, जिसे ‘खरा सौदा’ कहा जाता है। उनके पिता ने उन्हें 20 रुपये देकर खरा सौदा लाने को कहा। नानक जी ने उन पैसों से भूखे साधुओं को भोजन करवा दिया और पिता से कहा कि उन्होंने खरा सौदा कर लिया। गुरु नानक जी ने इस घटना से यह सिखाया कि ईश्वर का सच्चा सौदा दूसरों की सेवा और जरूरतमंदों की सहायता में निहित है।

गुरु नानक देव जी का संदेश था कि ईश्वर हर मनुष्य के हृदय में निवास करता है। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि हमें अपने हृदय से क्रोध, घृणा, और नफरत को दूर करना चाहिए, क्योंकि ऐसे मैले हृदय में परमात्मा का वास नहीं हो सकता। वे कहते थे कि सच्चाई, मेहनत और ईमानदारी की कमाई से ही जीवन जीना चाहिए और जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए।

जीवन के अंतिम दिनों में गुरु नानक देव जी करतारपुर में बस गए, और 25 सितंबर, 1539 को उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया। उन्होंने अपने शिष्य भाई लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया, जो आगे चलकर गुरु अंगद देव के नाम से प्रसिद्ध हुए।

गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं आज भी मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनके विचार और सिद्धांत समाज में सद्भाव, प्रेम और सेवा की भावना को बढ़ावा देते हैं। उनके प्रकाश पर्व पर हम सभी को यह प्रण लेना चाहिए कि हम उनके सिद्धांतों का अनुसरण करें और प्रेम, समानता, और सेवा का संदेश फैलाएं।

सतनाम वाहेगुरु!

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