बैतूल को मिला नया कलेक्टर, डॉक्टर से आईएएस बने सौरभ सोनवाने की हुई नियुक्ति।
ग्रामीण पृष्ठभूमि, एनसीसी कैडेट और मेडिकल बैकग्राउंड वाले अधिकारी संभालेंगे जिले की कमान।

बैतूल। जिले को नया कलेक्टर मिल गया है। 2017 बैच के आईएएस अधिकारी सौरभ संजय सोनवाने को बैतूल कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वे इससे पहले रीवा में नगर निगम आयुक्त के पद पर पदस्थ थे। ग्रामीण परिवेश, चिकित्सा शिक्षा और प्रशासनिक अनुभव के समन्वय के चलते उन्हें एक संवेदनशील और जमीनी अधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।
सौरभ सोनवाने का जन्म 1991 में महाराष्ट्र के जलगांव जिले में हुआ। उनका बचपन छिंदुरनी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बीता, जहां उनके पिता मेडिकल ऑफिसर थे। उन्होंने आठवीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की, जबकि नवमी से बारहवीं तक की शिक्षा जलगांव में पूरी की। इसके बाद उन्होंने मुंबई के ग्रैंड मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और कुछ समय तक डॉक्टर के रूप में भी कार्य किया।
उनकी मां एमकॉम शिक्षित हैं और योगा टीचर के रूप में कार्यरत हैं। परिवार में प्रशासनिक पृष्ठभूमि भी रही है, जहां उनके दादा डिप्टी कलेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए, वहीं नाना पुलिस विभाग में अधिकारी रहे। उनके बड़े भाई अहमदाबाद में इंजीनियर हैं और उनकी पत्नी भी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं। दोनों की मुलाकात गढ़चिरौली में सर्च एनजीओ के डायरेक्टर डॉ. अभय बंग के यहां आयोजित एक सेमिनार के दौरान हुई थी।
सोनवाने ने तीसरे प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर 2017 बैच के आईएएस बने। छात्र जीवन में वे एनसीसी कैडेट रहे और राजपथ पर महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनका मानना है कि व्यक्ति का व्यवहार ही उसकी असली पहचान होता है, पद और प्रतिष्ठा स्थायी नहीं होते।
वहीं निवर्तमान कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी का कार्यकाल भी उल्लेखनीय रहा। 2012 बैच के आईएएस अधिकारी सूर्यवंशी जनवरी 2024 से अप्रैल 2026 तक बैतूल कलेक्टर रहे और अब रीवा कलेक्टर के रूप में पदस्थ हैं। उनके कार्यकाल में ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ और ‘जल संचय-जन भागीदारी’ को राष्ट्रीय पहचान मिली। टीबी उन्मूलन, निर्वाचन कार्य और प्रशासनिक डिजिटाइजेशन में जिले को राज्य स्तर पर सराहना मिली। साथ ही भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई और देर रात निरीक्षण उनकी कार्यशैली की खास पहचान रही।




