health scienceछात्राओं ने पानी की जांच कर सीखा स्वास्थ्य से जुड़ा विज्ञान

गांव-गांव से जुटाए पानी के नमूनों पर छात्राओं ने किया परीक्षण

फोटो कैप्शन – शासकीय कन्या उ.मा. विद्यालय में छात्राओं ने देखा पानी की अशुद्धियों का असर

बैतूल। जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती, और पृथ्वी पर जल सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है। इसी उद्देश्य और इसके महत्व को समझाने के लिए 11 नवंबर को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बैतूल गंज में विद्यालय की छात्राओं को पानी की गुणवत्ता और परीक्षण विधि की जानकारी दी गई। इस कार्यशाला में शिक्षक महेश गुंजेले ने छात्राओं को उनके गांव और वार्ड से पीने के पानी का नमूना एकत्र करने का निर्देश दिया, जिनमें जुनावानी, रतनपुर, केलापुर, महुपानी, बाजपुर, उमरी जागीर, सोनाघाटी, पागंरा, भयावाड़ी, कोशमी, गवाईढाना, बुंडाला, झाड़ेगांव और बैतूल शहर के कई वार्ड शामिल थे।

छात्राओं ने इन नमूनों में पानी की पीएच मान, क्लोरीन, हार्डनेस, क्लोराइड, अल्कालिनिटी, आयरन, नाइट्रेट, टर्बिडिटी, फ्लोराइड, अमोनिया आदि का परीक्षण किया। शिक्षक महेश गुंजेले के मार्गदर्शन में छात्राओं ने रासायनिक तत्वों के अधिक उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों की जानकारी ली। बोरॉन और पारा जैसे तत्व तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं, जबकि क्लोराइड रक्तचाप बढ़ा सकता है। नाइट्रेट बच्चों में ब्लू बेबी सिंड्रोम का कारण बन सकता है, वहीं कीटनाशकों का सेवन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देता है।

परीक्षण के दौरान छात्राओं ने विद्यालय के आरओ के पानी और सामान्य पानी का पीएच मान जांचा, जो कि 7.5 पाया गया, और अन्य गांवों तथा वार्डों के पानी का पीएच मान 7.5 से 8.5 के बीच रहा, जो स्वीकार्य सीमा में है। फ्लोराइड की मात्रा भी 0.5 से 1.00 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई, जो कि भारतीय मानक ब्यूरो और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार सुरक्षित है।

शिक्षक महेश गुंजेले ने बताया कि पानी में उपस्थित रसायन जैसे फ्लोराइड दांतों और हड्डियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं, जबकि आर्सेनिक त्वचा रोग और कैंसर का कारण बन सकता है। इसलिए सभी को समय-समय पर पानी की जांच कर उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करनी चाहिए। इस कार्यशाला के माध्यम से छात्राओं ने पानी की गुणवत्ता के महत्व और उसकी जांच की विधियों को अच्छे से समझा, जिससे वे स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक जल के प्रति जागरूकता फैला सकें।

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