Failure Of Administration : सीएम के लिए शहर लोगों को कैद करना, जिम्मेदारों के लिए है सबक
– लाड़ली बहनें चिलचिलाती धूप में प्यास से होती रहीं बेहाल, जबरन रास्ते बंद करने से जनता नाराज
Betul News Today: बैतूल। सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह एक बार फिर बैतूल आए थे। ना तो जनता के लिए यह नया था और ना सीएम के लिए। पर जिम्मेदारों के लिए यह नया था या फिर अपने नंबर बढ़ाने का गेम प्लान रहा हो, जिसने जनता को खुशी देने की बजाय कदम कदम पर नाराज होने का मौका दिया।
अपने ही शहर में लोग कैद हो गए। हर तरफ रोड बंद कर प्रशासन और पुलिस यह जताने का प्रयास करती रही कि उनके सड़क के आसपास होने या गुजरने से मामाजी के लिए बिछाया रेड कारपेट या बिछाए गए फूल गंदे हो जाएंगे। प्रशासन की अदूरदर्शिता का आलम यह देखने को मिला कि मुख्यमंत्री को दोपहर 2.35 पर आना था, लेकिन पुलिस ने 12 बजे से रास्ते बंद कर डाले। पूरे 10 घंटे तक शहर के लोग खुद को कैद में महसूस करते हुए मामाजी और उनके प्रशासन को कोसने में जुटे रहे। कुल मिलाकर प्रशासन की नाकामी के कारण जितनी ब्रांडिग होनी थी वह तो हुई लेकिन पॉजीटिव नही बल्कि निगेटिव हुई है।
सोमवार को जिले के डेढ़ घंटे के प्रवास पर बैतूल पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के भू अधिकार पत्रक वितरण कार्यक्रम के दौरान अधिकारी और भाजपा नेता तो मुख्यमंत्री की अगवानी और कार्यक्रम में मस्त रहे और शहर की जनता पूरे दिन भारी जद्दोजहद झेलती रही। आलम ये था कि शहर के कई मुख्य रास्ते जबरन बन्द कर दिए गए। लोगों को आवागमन में परेशानी और मुसीबतें झेलनी पड़ी।
पल पल में लग रहा जाम लोगों के लिए दिन भर मुसीबत बना रहा। कार्यक्रम स्थल पर गांव गांव से बसों में भरकर महिलाओं और ग्रामीणों को लाकर पंडाल में बैठा दिया गया लेकिन उनके ना पीने के पानी की व्यवस्था की गई और ना भोजन की । हालत ये थी कि पंडाल के नीचे भीषण गर्मी में बैठी लाडली बहने भूखी प्यासी बैठकर मुख्यमंत्री के आने का इंतजार करती रही। मुख्यमंत्री तो आये लेकिन पूरे डेढ़ घण्टे की देरी से आना था 2.35 पर और आए 4 बजे । कुल मिलाकर मुख्यमंत्री का पूरा कार्यक्रम आम जन के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं था।
पानी की बोतलें और दुपट्टे पुलिस ने बाहर रखवाए:
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भू अधिकार पत्र के वितरण कार्यक्रम में सोमवार शाम 4 बजे बैतुल पहुंचे थे। इस दौरान उनका लाडली बहनाओं को संबोधित किये जाने का कार्यक्रम भी तय किया गया था। कार्यक्रम में लोगों और महिलाओं की भीड़ इक्कट्ठा करने के लिए लगभग 1000 बसें लगाई गई थी।
सुबह 10 बजे से ही बसों में बैठाकर महिलाओं और लोगों को कार्यक्रम स्थल पहुंचाए जाने का क्रम शुरू हो गया था । जैसे ही महिलाएं कार्यक्रम स्थल पर पहुंची, पंडाल में एंट्री देने के पूर्व ही महिलाओं के काले दुपट्टे और पानी की बोतलें बाहर ही रखवा ली गयी थी। दोपहर होते होते काफी बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यक्रम स्थल पर पहुंच चुकी थी। लेकिन पानी की बोतलें वापस लिए जाने के कारण प्यास के मारे लाडली बहने परेशान होने लगी थी। अधिकारियों का कहना था कि, प्रत्येक कम्पार्टमेंट में ठंडे पानी के केम्पर रखवाए गए थे। लेकिन इन केम्परों मे पानी खत्म होने के बाद दूसरा केम्पर तक नहीं रखवाया गया। लिहाजा महिलाएं दिन भर पीने के पानी के लिए तरसती रही। सुबह से मुख्यमंत्री का इंतजार करते करते दोपहर हो गयी लेकिन मौके पर भोजन आदि की व्यवस्था नहीं होने के कारण महिलाओं सहित उनके साथ आये छोटे छोटे बच्चे भूख से बिलखते नजर आए। कई महिलाओं ने अपने खर्च पर बाहर से बिस्किट, आदि खरीदकर अपने पेट की भूख शांत की।
ग्रामीण महिलाओं का कहना था कि जब मुख्यमंत्री शाम 4 बजे आने वाले थे तो हमे सुबह से यहां लाकर बैठा देने का कौन सा तुक था। ना पीने को पानी मिला ना खाने को भोजन, जबकि हमे बताया गया था कि सारी व्यवस्था कार्यक्रम स्थल पर उपलब्ध करा दी जाएंगी।
थाना चौक से पुलिस ग्राउंड मार्ग दिन भर रहा बंद:
मुख्यमंत्री के नगर आगमन पर सबसे ज्यादा समस्या शहर के आम नागरिकों को झेलनी पड़ी। मुख्यमंत्री के आने का समय दोपहर 2.35 बजे का था लेकिन वे आए शाम 4 बजे । इधर जिला एवं पुलिस प्रशासन ने सुबह से ही शहर की अधिकांश सड़के लोगों के आवागमन के लिए बन्द कर दी थी। अपने काम से घरों से निकलने वाले लोग जिधर जा रहे उधर ही रास्ता बंद मिल रहा था। रही सही कसर सड़कों पर तैनात पुलिस कर्मी पूरी कर रहे थे। लोगों को जबरन आने जाने से रोका जा रहा था।
थाना चौक से लेकर, स्वीपर कालोनी, मुर्गी चौक, कालेज चौक, कंट्रोल रूम चौराहे तक के चारों तरफ के रास्ते शिवराज के होर्डिंग लगाकर सुबह से ही बन्द कर दिए गए थे। कालापाठा, हमलापुर, एवं विकास नगर के लोगों को गली मोहल्लों के रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा था । यही स्थिति गंज से कोठी बाजार आने जाने, तथा खंजनपुर, अर्जुन नगर से कोठी बाजार आने जाने के दौरान भी नजर आ रही थी। लोगों को रास्ते बंद होने के कारण परेशानियां झेलते हुए लंबे रास्ते तय करने पड़े।
जगह जगह बनी जाम की स्थिति:
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन द्वारा कई ऐसे रास्ते भी बन्द कर दिए गए थे, जहां इन रास्तों को बंद करने का कोई औचित्य ही नहीं था। बताया जा रहा है कि बडोरा, सदर एवं गंज के भी कई इलाकों के रास्ते जबरन बन्द कर रखे गए थे । जिससे आम लोगों में नाराजगी भी नजर आई इन इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना था कि मुख्यमंत्री सोनाघाटी, थाना चौक, मुर्गी चौक, कालेज चौराहा होते हुए पुलिस ग्राउंड पहुंचे थे। ओर इसी रास्ते से वे ग्राम टिगरिया में बने हेलीपेड पर पहुंचे। ठीक है यह रास्ता प्रशासन ने बन्द कर दिया।
जब मुख्यमंत्री शाम 4 बजे आए तो सुबह से यह रास्ता क्यों बन्द रखा गया। सवाल ये भी है कि जब मुख्यमंत्री के आने जाने का सीधा रास्ता था तो अन्य रास्ते बाधित क्यों किए गए । मात्र डेढ घण्टे के कार्यक्रम के लिए आम जन को पूरे दिन परेशान किया जाना आखिर कहां तक सही है। मुख्यमंत्री तो आये और चले गए लेकिन आम जन ने जो परेशानी झेली है आखिर उसे भुलाया थोड़ी जा सकेगा। इस पर प्रशासन को भी विचार करने की जरूरत है।






