11.76 करोड़ की नल-जल योजना में गुणवत्ता और तकनीकी नियमों की अनदेखी।
सड़क रेस्टोरेशन में घटिया सामग्री, बिना मापदंड के हो रहा निर्माण कार्य । अधिकारियों-ठेकेदार की मिलीभगत, पूर्व जांच रिपोर्ट दबाने का भी आरोप।

बैतूल। चिचोली नगर परिषद में संचालित अमृत 2.0 जल प्रदाय योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। वार्ड क्रमांक 15 की पार्षद नेहा आर्य ने 28 अप्रैल को कलेक्टर से शिकायत करते हुए लगभग 11 करोड़ 76 लाख रुपये की इस योजना में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की अनदेखी का मुद्दा उठाया है। शिकायत में ठेकेदार, सीएमओ, उपयंत्री और अध्यक्ष की मिलीभगत से काम में लापरवाही और कमीशनखोरी के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में बताया गया है कि सड़क रेस्टोरेशन कार्य में घटिया रेत और सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है, साथ ही बिना मापदंड के सड़क तोड़कर नालियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। कई स्थानों पर वाइब्रेट मशीन का उपयोग नहीं किया जा रहा और खुदाई के बाद समतलीकरण भी नहीं किया गया, जिससे भविष्य में सड़कें जल्दी खराब होने की आशंका जताई गई है। पिछले 8 से 10 महीनों से कई वार्डों में खुदाई के बाद काम अधूरा पड़ा है, जिससे आम लोगों को आवागमन में परेशानी और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
पार्षद ने यह भी आरोप लगाया है कि योजना के तहत पाइपलाइन टंकियों के माध्यम से जोड़ी जानी थी, लेकिन मनमाने तरीके से बोर से जोड़कर तकनीकी खामियां पैदा की जा रही हैं। वार्ड क्रमांक 9 में तालाब किनारे बनी पेयजल टंकी के पास डीपीआर में प्रस्तावित बाउंड्रीवाल और गेट का निर्माण नहीं किया गया, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि पूर्व में मार्च 2025 में हुई जांच में वार्ड 6 और 14 में कई खामियां पाई गई थीं, लेकिन कथित रूप से लेन-देन कर मामले को दबा दिया गया। अब तक जांच प्रतिवेदन भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
सबसे गंभीर चिंता वार्ड 1 और 15 के बीच प्रस्तावित पाइपलाइन को लेकर जताई गई है, जहां टूटी-फूटी और गहरी नाली में सीवरेज बह रहा है। इस स्थिति में पाइपलाइन डालने से दूषित पानी सप्लाई होने का खतरा है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। पार्षद ने पहले नाली निर्माण पूरा करने के बाद ही पाइपलाइन बिछाने की मांग की है और आरोप लगाया है कि स्वीकृत कार्य को जानबूझकर रोका गया है।
इसके अलावा डीपीआर की मांग करने पर भी जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया गया है, जिसे अधिकारों का हनन बताया गया है। पार्षद ने कलेक्टर से सभी बिंदुओं की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।




