जयस की वन अधिकार यात्रा शुरू

कानून लागू होने के 18 साल बाद भी आदेशों की अनदेखी का आरोप

पहाड़, चट्टान, घास मद की जमीनों को पी.एफ. बताकर किया जा रहा कब्जा 

बैतूल। जय आदिवासी युवा शक्ति जयस म.प्र. के नर्मदापुरम संभाग अध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष जयस संदीप कुमार धुर्वे के नेतृत्व में तथा डॉ. हिरालाल अलावा जयस राष्ट्रीय संरक्षक एवं मनावर विधायक के मार्गदर्शन में वन अधिकार यात्रा निकाली जा रही है। संगठन ने कहा कि संसद द्वारा पारित अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 जनवरी 2008 से लागू है, फिर भी ऐतिहासिक अन्याय दूर करने संबंधी प्रावधानों का पालन नहीं हुआ।

जयस ने बताया कि 1980-81 के पटवारी मानचित्र, खसरा पंजी, निस्तार पत्रक व अतिक्रमण पंजी की प्रतियां ग्रामसभा को देने तथा पूरा रकबा राजस्व विभाग को सौंपने के शासन आदेश दिनांक 4 सितंबर 2024, 16 अप्रैल 2025 व 7 अक्टूबर 2025 का पालन नहीं हुआ। बड़े झाड़, छोटे झाड़, पहाड़, चट्टान, घास मद की जमीनों को वन विभाग द्वारा पी.एफ. बताकर कब्जा किया जा रहा है, जबकि भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237(1), पेसा कानून 1996, वन अधिकार कानून 2006 व संविधान की 11वीं अनुसूची के तहत अधिकार ग्रामसभा को हैं।

संगठन ने सामुदायिक व व्यक्तिगत वन अधिकार दावों की पुन: जांच, बुजुर्गों के कथन के आधार पर सत्यापन, अमान्य दावों पर लगी आपत्तियां हटाने, आर.एफ. क्षेत्र के देवस्थलों, रास्तों, नदी-नालों, तालाबों पर सामुदायिक अधिकार देने, 30/05/2022 के पत्र अनुसार खसरा प्रविष्टि करने व आरक्षित वन घोषित करने की कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग की है।

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