Donated blood for the 16th time: जयस के जिला महामंत्री सोनू पानसे ने 16वीं बार किया रक्तदान, रितेश धुर्वे ने 13वीं बार

समर्पित सेवाभाव से जीवन रक्षा का लिया संकल्प, सुनील मर्सकोले का रक्त समूह एबी-वीई पाया गया, जो केवल 4 प्रतिशत लोगों में ही पाया जाता है

 

बैतूल। भैंसदेही के युवा समाजसेवी एवं जयस के जिला महामंत्री सोनू पानसे ने 16वीं बार रक्तदान कर समाज के प्रति अपने समर्पण का परिचय दिया। भीमपुर के समाजसेवी शम्भू धुर्वे के कॉल पर उन्होंने त्वरित प्रतिक्रिया दी, जब एक आदिवासी महिला को जीवनरक्षक रक्त की आवश्यकता थी। इसी दौरान, अमरावती जिले के समाजसेवी एवं कराटे चैंपियन रितेश धुर्वे ने भी 13वीं बार रक्तदान कर समाजसेवा में योगदान दिया।

शम्भू धुर्वे ने सोनू पानसे को सूचित किया कि एक आदिवासी महिला का हीमोग्लोबिन 4 से भी कम हो गया है और उसे तत्काल 4 यूनिट ए+वीई रक्त की आवश्यकता है। सूचना मिलते ही, सोनू पानसे अपने साथियों के साथ भैंसदेही से जिला चिकित्सालय बैतूल पहुंचे और तुरंत रक्तदान किया।

समाजसेवा का अनूठा उदाहरण

रक्तदान के दौरान सोनू पानसे ने युवाओं को संदेश दिया कि हर तीन महीने में रक्तदान अवश्य करें ताकि जरूरतमंदों को समय पर रक्त मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि बाइक चलाते समय हेलमेट का उपयोग करें, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में रक्त की कमी से होने वाली मौतों से बचा जा सके।

भैंसदेही के जयस कार्यकर्ता सुनील मर्सकोले का रक्त समूह एबी-वीई पाया गया, जो केवल 4 प्रतिशत लोगों में ही पाया जाता है। सुनील मर्सकोले ने कहा कि वे हर समय रक्तदान के लिए तैयार हैं, और यदि कभी किसी को एबी-वीई रक्त की आवश्यकता हो, तो वे तुरंत मदद के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस मौके पर समाजसेवी रितेश धुर्वे भी सोनू पानसे के बुलावे पर उपस्थित हुए और उन्होंने 13वीं बार रक्तदान किया। रितेश धुर्वे ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जब भी किसी को रक्त की आवश्यकता हो, उन्हें जरूर रक्तदान करना चाहिए क्योंकि इससे किसी की जान बचाई जा सकती है।

रक्तदान में जुटे जयस कार्यकर्ता

इस दौरान जयस के प्रदेश प्रचारक शम्भू धुर्वे, सुनील मर्सकोले, मनीष वट्टी, महेश्वर कवडे, जयस महामंत्री भीमपुर भी उपस्थित रहे। इन सभी ने रक्तदान को महत्त्वपूर्ण मानते हुए आगे भी ऐसे सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देने की बात कही। सोनू पानसे और रितेश धुर्वे की इस अद्वितीय सेवा भावना ने युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्थापित की है। दोनों ही समाजसेवियों का उद्देश्य है कि किसी भी जरूरतमंद को समय पर रक्त मिल सके और किसी की जान बचाई जा सके। इस सेवा कार्य के लिए उनकी सराहना की जा रही है, और वे समाज के लिए एक मिसाल बन गए हैं।

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