राजनीति का अंतिम पड़ाव कहां है….
लेखक - विजय के वर्मा

प्रिय मित्रों
दुनिया आज पैसों की धुरी पर घूम रही है यही आज के इस कलयुग में आदमी का भविष्य बन गया है जो कि आदमी को आदमी से दूर एक ऐसे तनाव ग्रस्त वातावरण में जीने को मजबूर कर रहा है जिसमें प्रेम और शांति मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई में मिले अवशेषों की तरह कहीं-कहीं दिखाई पड़ जाते हैं, तो दिल में एक आशा की उम्मीद कि चलो चंद मुट्ठी भर देश ही सही लेकिन अडिग हिमालय की तरह आज भी विश्व में प्रेम और शांति बनाए रखने के मार्ग पर भारत की अगुवाई में तटस्थ खड़े हैं। एक अच्छे काम की बात है जो आने वाले दिनों में दुनिया के सभी सुपर पावर सेंटरों को यह मानने पर मजबूर करेगी कि बम, गोली, बारूद से दुनिया नहीं चलती सिर्फ वातावरण में चिंता और तनाव का दुखद धुआं ही फैला है जो समस्त प्राणियों को घुट घुट कर जीने को मजबूर करता है। प्रेम और शांति से मिलो दूर इसका हल निकालना होगा, सभी जिम्मेदार और समझदार लोगों को एकमत होकर तभी कुछ अच्छा हो सकता है आने वाले कल में जिसे हम सुनहरा कल कहते आ रहे हैं पिछले 79 सालों से।
राजनीति का अंतिम पड़ाव राजनीति ही है जिस पर चलकर दुनिया को मरुस्थल बनने से बचाया जा सकता है यह एक सच्चाई है जिसे झूठलाया नहीं जा सकता। जो जनता जनार्दन की भावनाओं को समझने के लिए अपनी गुप्तचर संस्थाओं के द्वारा जनता के दुख दर्द को दूर करने का हल निकालेगा मेहनत करके राजा जनक के समान हल चलाकर, वही देश में हरियाली लाएगा सुख शांति की, यह सौ प्रतिशत सच है। अगर रामजी अपने गुप्त चरों की रिपोर्ट को नजर अंदाज कर दिए होते तो रामायण संपूर्ण नहीं होती इसलिए अगर कलयुग में रामायण लिखना है तो जनता जनार्दन की सोच को समझना होगा, अपनी गुप्तचर संस्थाओं के माध्यम से, फिर आप इनका सदुपयोग करते हैं या दुरुपयोग यह आपकी सोच पर निर्भर करता है। पहली बार जब दिल्ली की सत्ता की कुर्सी पर अरविंद केजरीवाल विराजमान हुए थे तब भी हमने परिणाम को प्रणाम नाम से थोड़ा बहुत लिखा था जो स्थानीय अखबारों के माध्यम से आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना था।
उसी तरह अब आने वाले चुनाव परिणाम में जनता के मन की बात हमें पता चलेगी इसको सभी को स्वीकार करके आने वाले कल में बिना लाग लपेट के आगे कार्य करना चाहिए क्योंकि पिछले चुनाव में मध्य प्रदेश के नेता कैलाश विजयवर्गीय के फेल होने के बाद भी विधायकों की संख्या बढ़ाने में वे कुछ सफल जरूर हुए, लेकिन अब की बार यह अमित शाह की अग्नि परीक्षा है अब इसमें वह पास होते हैं या फेल बंगाल में यह अभी भविष्य के गर्भ में छिपा है। अगर पास होते हैं तो बीजेपी क्या करेगी यह तो पार्टी के नेता बता ही चुके हैं और अगर फेल हो जाते हैं तो फिर क्या होगा यह अभी भविष्य के गर्भ में छिपा प्रश्न है, जिसका उत्तर आने वाले कल में ही मिलेगा, जिसकी जिसकी प्रतीक्षा देश के हर जिम्मेदार और समझदार व्यक्ति के साथ देश के करोड़ों भारतवासियों को है।




