पीएचई की लापरवाही से दूषित पानी पीने को मजबूर हिवरखेड के ग्रामीण।

जिला पंचायत सदस्य उर्मिला गव्हाड़े ने कलेक्टर से की शिकायत।

 

बैतूल। प्रभात पट्टन ब्लाक के ग्राम हिवरखेड में हालात ऐसे बन गए हैं कि ग्रामीणों को मजबूरी में दूषित पानी पीना पड़ रहा है। पीएचई विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से चल रही नल-जल योजना अब सवालों के घेरे में है। गांव की मुख्य गलियों में वाल लगाने के लिए गहरे और लंबे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं, जिनमें नालियों का गंदा पानी जमा हो रहा है। आरोप है कि यही पानी पाइपलाइन के जरिए घरों के नलों तक पहुंच रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सदस्य उर्मिला गव्हाड़े ने कलेक्टर से शिकायत कर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत हिवरखेड में पाइपलाइन बिछाने का कार्य धीमी गति से चल रहा है। गांव के भीतर जगह-जगह वाल के लिए गड्ढे खोदे गए हैं, लेकिन उन्हें खुला छोड़ दिया गया है। इन गड्ढों में नालियों का गंदा और बदबूदार पानी जमा हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यही दूषित पानी पाइपलाइन में मिलकर घरों तक पहुंच रहा है, जिससे बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है।

ग्रामीण कचरा घोटे ने बताया कि होली चौक स्थित उनके घर के पास पिछले एक माह से गड्ढा खोदा हुआ है। उस गड्ढे में लगे वाल के आसपास गंदा पानी भरा रहता है और वही पानी घरों के नलों में पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि गड्ढा गहरा और लंबा होने के कारण रात में दुर्घटनाएं हो रही हैं और छोटे बच्चों के गिरने का डर बना रहता है।

– बार-बार सूचना, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों ने बताया कि पीएचई विभाग के इंजीनियर और संबंधित ठेकेदार को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। लगातार अनदेखी के बाद गांव के विभिन्न मोहल्लों के लोग शिकायत लेकर जिला पंचायत सदस्य उर्मिला गव्हाड़े के पास पहुंचे।

जिला पंचायत सदस्य उर्मिला गव्हाड़े ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचीं और स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि गांव में जगह-जगह खोदे गए गड्ढों में गंदा पानी जमा है और वही पानी नलों के माध्यम से घरों में पीने के लिए पहुंच रहा है, जिससे लोग बीमार हो सकते हैं। उन्होंने पीएचई विभाग के ई ई बघेल को भी अवगत कराया, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो कलेक्टर को शिकायत कर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की, ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल मिल सके और संभावित स्वास्थ्य संकट को रोका जा सके।

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