180 दिन का जीएसटी नियम बन सकता है बकाया वसूली का हथियार।

एमएसएमई समाधान पोर्टल से 45 दिन में मिल सकती है राहत।

– अधिवक्ता भारत सेन

बैतूल। फंसे पेमेंट और जीएसटी लायबिलिटी से बचाव के कानूनी उपायों पर अधिवक्ता भारत सेन ने व्यापारियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि कई बार व्यापारी माल बेचने के बाद महीनों तक भुगतान का इंतजार करते हैं, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है और साथ ही उन्हें संबंधित बिल का जीएसटी भी जमा करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में कानून व्यापारियों को कई प्रभावी अधिकार प्रदान करता है।

अधिवक्ता भारत सेन ने बताया कि जीएसटी नियम 37 के तहत यदि खरीदार बिल जारी होने के 180 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करता है तो उसे उस बिल पर प्राप्त इनपुट टैक्स क्रेडिट ब्याज सहित वापस करना पड़ता है। ऐसे में व्यापारी खरीदार को इस नियम की जानकारी देकर भुगतान के लिए दबाव बना सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उद्यम पंजीकरण के तहत सूक्ष्म और लघु उद्योगों को एमएसएमई डेवलपमेंट एक्ट, 2006 के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त है। कानून के अनुसार खरीदार को अधिकतम 45 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य है। देरी होने पर तीन गुना बैंक ब्याज देना पड़ सकता है। व्यापारी एमएसएमई समाधान पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जहां मामले की सुनवाई कर प्रभावी कार्रवाई की जाती है।

अधिवक्ता ने बताया कि भुगतान नहीं मिलने की स्थिति में व्यापारी सिविल कोर्ट में आदेश 37 के तहत समरी सूट दायर कर सकते हैं। यह सामान्य मुकदमों की तुलना में त्वरित प्रक्रिया है, जिसमें खरीदार को भुगतान न करने का वैध कारण साबित करना होता है, अन्यथा न्यायालय व्यापारी के पक्ष में डिक्री पारित कर सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि यदि सभी प्रयासों के बाद बकाया राशि वसूल होना संभव नहीं रह जाता और वह बैड डेब्ट की स्थिति में पहुंच जाती है, तो जीएसटी अधिनियम की धारा 34 के तहत क्रेडिट नोट जारी कर टैक्स देनदारी को कम या समायोजित किया जा सकता है।

अधिवक्ता भारत सेन ने व्यापारियों को सलाह दी कि प्रत्येक व्यापारिक लेनदेन लिखित एग्रीमेंट या परचेज ऑर्डर के आधार पर करें, बिल में भुगतान की शर्तें स्पष्ट रखें और भुगतान रुकने की स्थिति में समय रहते विधिक सलाह लेकर नोटिस जारी करें। उन्होंने कहा कि सतर्कता और कानूनी जागरूकता ही सुरक्षित व्यापार की सबसे बड़ी कुंजी है।

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