भीमपुर में पांच महान क्रांतिकारियों की स्थापित हुई प्रतिमा, हजारों की मौजूदगी में निकली महारैली:

जयस के नेतृत्व में ऐतिहासिक आयोजन, कार्यक्रम के अंत में सौंपा गया ज्ञापन । पांचवीं अनुसूची पर विफलता का आरोप, राज्यपाल से इस्तीफा देने की मांग।

 

बैतूल। भीमपुर में 1 मार्च को पांच महान क्रांतिकारियों वीरांगना महारानी दुर्गावती, भगवान बिरसा मुंडा, क्रांतिकारी सरदार विष्णु सिंह गोंड, क्रांतिकारी गंजन सिंह कोरकू और बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं की स्थापना हजारों समाजजनों की मौजूदगी में की गई। जय आदिवासी युवा शक्ति के जिला अध्यक्ष संदीप धुर्वे के नेतृत्व में विशाल महारैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में एसटी, एससी और ओबीसी समाज के लोग शामिल हुए।

बिरसा मुंडा चौक से निकली महारैली

कार्यक्रम की शुरुआत बिरसा मुंडा चौक आदर्श पिपरिया से हुई, जहां से जयस के नेतृत्व में विशाल महारैली बस स्टैंड भीमपुर तक निकाली गई। रैली में जनजातीय समाज के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और आमजन बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में आयोजन का व्यापक प्रभाव दिखाई दिया।

सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन

प्रतिमा स्थापना के बाद पुलिस ग्राउंड भीमपुर में जिला स्तरीय आदिवासी सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों का स्वागत-सम्मान, आदिवासी सांस्कृतिक नृत्य और सामाजिक उद्बोधन हुआ, जिसमें समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को मंच मिला।

लोक कलाकारों ने दी प्रस्तुति

सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रियांशी भलावी, ममता उइके, विशाल काकोड़िया और शिवम इरपाचे द्वारा लाइव आर्केस्ट्रा प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी रही और आयोजन सामाजिक एकजुटता का मंच बना।

– कार्यक्रम के अंत में ज्ञापन सौंपा

कार्यक्रम के समापन पर आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों द्वारा मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के पालन से जुड़े मुद्दे उठाए गए।

ज्ञापन में कहा गया कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद से लेकर 26 जनवरी 2025 तक के 75 वर्षों में जनजातीय समुदाय से संबंधित पांचवीं अनुसूची के अधिकारों, जवाबदेही और जिम्मेदारियों का एक बार भी प्रभावी उपयोग नहीं किया गया। आरोप लगाया गया कि जनजातीय समाज को अधिकार देने के बजाय उनके अधिकारों को सीमित करने वाली कार्यवाहियों में राजभवन की सहमति दी गई।

भूमि और प्रशासनिक निर्णयों पर उठाया प्रश्न

ज्ञापन में राज्य में भूमि से जुड़े ऐतिहासिक अन्याय और लोकतांत्रिक व्यवस्था को दी गई चुनौतियों का उल्लेख करते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन को पूर्व में भेजे गए ज्ञापन का हवाला भी दिया गया। इसमें यह भी कहा गया कि कलेक्टर द्वारा संविधान, कानून और न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी करते हुए राजस्व ग्रामों की सामुदायिक भूमि को समाज से लेकर आरक्षित वन घोषित करने की कार्रवाई टीएल प्रकरणों के माध्यम से की जा रही है।

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