transported the passenger safely to the destinationट्रेन से छूटे यात्री को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाया,बैतूल में मानवता का सहारा

शंकर नगर के मालवी परिवार ने पेश की इंसानियत की मिसाल


बैतूल। बीते रविवार को रेलवे स्टेशन पर एक अनजान यात्री के साथ जो घटना घटी, वह मानवता और इंसानियत की एक मिसाल बन गई। वाराणसी से मैसूर के लिए स्लीपर टिकट लेकर सफर कर रहे मिस्टर भाग्यनाथा एन,जो मदुरई, बेंगलुरु के निवासी हैं, रविवार दोपहर वे नाश्ता लेने के लिए बैतूल रेलवे स्टेशन पर उतरे थे। लेकिन, अचानक गाड़ी चल पड़ी और उनका सारा सामान ट्रेन में ही रह गया।
बाहर आने के बाद, उनके पास पैसे नहीं थे और वह असमंजस में इधर-उधर भटकने लगे। इसी दौरान, रविवार लगभग 4 बजे वे शंकर वार्ड स्थित श्री माता मंदिर के पास विजय सीताराम मालवीय के घर के सामने बीपी हाई होने के कारण उन्हें चक्कर आ गया और वे गिर पड़े। शहर के शंकर नगर निवासी विजय सीताराम मालवीय और उनके परिवार ने उन्हें तुरंत सहायता प्रदान की। परिवार ने उन्हें नाश्ता, पानी, और चाय दी, और स्थानीय डॉक्टर विनोद लिल्होरे द्वारा प्राथमिक उपचार भी करवाया।
मिस्टर भाग्यनाथा की तबियत थोड़ी संभलने के बाद उनसे बातचीत की गई, भाग्यनाथा एन केवल तमिल और कन्नड़ भाषा बोल रहे थे, जिससे लोगों से संवाद करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया। वह अपनी तकलीफें व्यक्त नहीं कर पा रहे थे, और स्थानीय लोग उनकी भाषा को समझ नहीं पा रहे थे। इस भाषा की बाधा ने स्थिति को और जटिल बना दिया था, लेकिन इसके बावजूद, मालवीय परिवार और श्री माता मंदिर समिति के सदस्यों ने अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं रखी। भले ही वे उनकी भाषा नहीं समझ पा रहे थे, पर उनकी मदद करने का दृढ़ संकल्प और मानवीयता ने इस कठिनाई को भी मात दी। किसी प्रकार उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी के नंबर दिए। उनसे संपर्क किया गया और बेंगलुरु स्थित उनके दामाद मिस्टर हरीश गौड़ा से बात हुई। गौड़ा ने तत्काल उनकी टिकट की व्यवस्था की और उनके लिए कुछ पैसे भी भिजवाए। यात्री को निजी लॉज में ठहरने की व्यवस्था की गई। इस दौरान, यात्री को भोजन और पानी की पूरी व्यवस्था की गई, जिससे उसे किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़ा। समाजसेवियों ने उसे मेहमान की तरह सम्मानित किया और उसकी हर जरूरत का ध्यान रखा, जिससे उसने राहत की सांस ली।
श्री माता मंदिर समिति के दीपक साहू ने बताया कि इस कार्य में मालवी परिवार का सराहनीय योगदान रहा, जिन्होंने पूरी जिम्मेदारी से इस कार्य को एक मिशन मंजिल तक पहुंचाने की सोच के साथ अंजाम दिया। श्री माता मंदिर समिति के अध्यक्ष डब्बू सेठ और अन्य सहयोगियों ने मिलकर मिस्टर भाग्यनाथा के रहने की व्यवस्था की। बुधवार 28 अगस्त को रेलवे अधिकारी अनुराग दुबे और पंकज कुमार के सहयोग से उन्हें एसी सेकेंड क्लास की ट्रेन में बिठाया गया, और बेंगलुरु के लिए रवाना किया गया। बेंगलुरु में, उनकी बेटी ने प्लेटफार्म नंबर पांच पर उन्हें रिसीव किया और सुरक्षित पहुंचने की सूचना दी। गौड़ा परिवार ने इस अद्भुत और सराहनीय कार्य के लिए श्री माता मंदिर समिति के अध्यक्ष और सभी सहयोगी मित्रों का धन्यवाद व्यक्त किया। यह घटना बैतूल के नागरिकों की इंसानियत और सहयोग की भावना का जीवंत उदाहरण है, जो किसी भी अजनबी को भी अपने परिवार की तरह सम्मान और सहायता प्रदान करने में पीछे नहीं हटते।

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