ससुंद्रा चेकिंग प्वाइंट पर हंगामे की असली वजह आई सामने, अवैध वसूली नहीं एक्सपायर परमिट बना विवाद की जड़।

फोरलेन जाम करने वाले ट्रक चालक के दस्तावेज निकले अवैध, कार्रवाई से बचने के लिए किया हंगामा । नागपुर–भोपाल नेशनल हाईवे पर चेकिंग के दौरान शुरू हुआ विवाद, ड्राइवर ने ट्रक आड़ा खड़ा कर बनाया दबाव।

बैतूल। नागपुर–भोपाल नेशनल हाईवे पर मुलताई के पास स्थित ससुंद्रा चेकिंग प्वाइंट को लेकर जिस तरह से अवैध वसूली और मारपीट की कहानी सामने आई थी, अब उसी मामले में एक के बाद एक ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जो पूरे घटनाक्रम की दिशा ही बदल रहे हैं। जिस ट्रक चालक के साथ कथित वसूली और मारपीट का आरोप लगाया गया, उसी चालक के वाहन के दस्तावेजों की स्थिति ने पूरी कहानी को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।

– परमीट खत्म, पीयूसी खत्म, फिर भी चला रहा था वाहन

जानकारी के अनुसार वाहन क्रमांक सीजी 04 क्यूएफ 5918 के चालक सुरेश जाट, निवासी देवास मध्यप्रदेश का नेशनल परमीट 18 मार्च 2026 को ही समाप्त हो चुका था। इसके अलावा वाहन का पीयूसी भी 17 मार्च 2026 को खत्म हो गया था। यानी जिस वाहन को चेकिंग के दौरान रोका गया, वह जरूरी दस्तावेजों के बिना ही नेशनल हाईवे पर चल रहा था। ऐसे में सवाल यह उठने लगा है कि वैध दस्तावेजों के बिना पकड़े जाने के बाद क्या विवाद जानबूझकर खड़ा किया गया।

– कार्रवाई से बचने के लिए आड़ा खड़ा किया ट्रक

परिवहन विभाग के कर्मचारियों के अनुसार चेकिंग के दौरान वाहन को रोका गया तो चालक ने पहले वहां से निकलने की कोशिश की, लेकिन जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने चेकिंग प्वाइंट से लगभग 900 मीटर आगे जाकर ट्रक को फोरलेन पर आड़ा खड़ा कर दिया। इसके बाद पीछे आ रहे अन्य ट्रक चालकों ने भी वाहन खड़े कर दिए और देखते ही देखते हाईवे पर जाम लग गया। बताया जा रहा है कि जाम लगभग दो किलोमीटर तक फैल गया और आने-जाने वाले कई वाहन फंस गए।

– बैरियर प्रभारी ने आरोपों को बताया निराधार

ससुंद्रा चेक पोस्ट के बैरियर प्रभारी अनिमेष जैन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी वाहन चालक से अवैध वसूली नहीं की गई है। उनके अनुसार वाहन चालक सुरेश जाट नशे की हालत में था और उसके वाहन के दस्तावेज भी वैध नहीं थे। विभाग की ओर से पीयूसी खत्म होने पर पांच हजार रुपए और बिना नेशनल परमीट वाहन चलाने पर 30 हजार 900 रुपए के अर्थदंड की कार्रवाई की बात कही गई थी, जिसके बाद चालक ने हंगामा शुरू कर दिया। बैरियर प्रभारी ने यह भी कहा कि चेकिंग पूरी तरह नियमों के तहत की जा रही थी।

– नियमित चेकिंग के दौरान बढ़ा विवाद

परिवहन विभाग के अनुसार हर महीने के तीसरे और चौथे सप्ताह में दुपहिया से लेकर भारी वाहनों तक की दस्तावेजों की जांच की जाती है। इसी क्रम में ससुंद्रा के पास वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। जांच के दौरान जब सुरेश जाट के वाहन के दस्तावेजों की वैधता खत्म पाई गई, तो उस पर कार्रवाई की तैयारी की गई। लेकिन कार्रवाई से बचने के लिए चालक ने अन्य ट्रक चालकों को भी उकसाया और मामला अचानक बड़ा बन गया।

– गौवंश तस्करी रोकने के लिए भी की जाती है सख्त चेकिंग

बैरियर प्रभारी अनिमेष जैन ने बताया कि नागपुर–भोपाल नेशनल हाईवे से बड़ी संख्या में कंटेनर और बंद वाहनों के जरिए पशुओं की तस्करी की शिकायतें लगातार मिलती रहती हैं। राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार कई बार वाहनों की सघन जांच करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में वैध दस्तावेज नहीं होने पर वाहन चालक विवाद खड़ा कर देते हैं ताकि चेकिंग पर दबाव बनाया जा सके।

राष्ट्रीय हिंदू सेना के प्रदेश अध्यक्ष दीपक मालवीय ने कहा कि यदि पुलिस और आरटीओ समय-समय पर वाहनों की सख्त चेकिंग न करें तो बड़ी संख्या में गोवंश की तस्करी लगातार बढ़ती रहेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में नशे से जुड़े अवैध कारोबार में कंटेनर और ऐसे वाहन चालक लिप्त पाए गए हैं, जो चेकिंग के दौरान भागने की कोशिश करते हुए पकड़े जाते हैं।

– हंगामे के बाद खुलने लगी पूरी सच्चाई

पूरे घटनाक्रम के बाद अब यह मामला जाम या विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। वाहन के दस्तावेजों की स्थिति, बैरियर प्रभारी का बयान और कार्रवाई से बचने की कोशिश जैसे तथ्य यह संकेत दे रहे हैं कि जिस तरह से अवैध वसूली का आरोप लगाया गया, वह पूरी तरह एकतरफा भी हो सकता है। अब प्रशासनिक स्तर पर जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी, लेकिन अब तक सामने आए तथ्यों ने ससुंद्रा चेकिंग प्वाइंट के पूरे विवाद को नई दिशा जरूर दे दी है।

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