वर्ष 1999 के अवैध नियमितीकरण की आग फिर भड़की, पिता की मौत का हिसाब मांगते हुए कलेक्टर के सामने पहुंचा बेटा।

वरिष्ठता सूची में नौवें नंबर पर नाम, फिर भी नौकरी नहीं मिली और खत्म हो गई जिंदगी, अब जनसुनवाई में उठी 25 साल पुरानी पीड़ा। मानसिक प्रताड़ना से आत्महत्या का आरोप, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और परिवार को न्याय की मांग।

बैतूल। वर्ष 1999 में हुए नियमितीकरण का मामला अब एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है और इस बार यह नियुक्ति का विवाद नहीं एक परिवार की बर्बादी की कहानी बनकर सामने आया है। मराठी मोहल्ला कोठीबाजार निवासी संजय सोनी जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने पहुंचे और उन्होंने अपने पिता स्व. विजय वल्द राधेलाल सोनी की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

संजय सोनी ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि उनके पिता विजय राधेलाल सोनी वर्ष 1984 से वनवृत्त बैतूल के दक्षिण सामान्य वनमंडल में दैवेभो के रूप में वाहन चालक के पद पर लगातार कार्यरत थे। शासन के आदेश के अनुसार वर्ष 1998 में ऐसे कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाना था और इसी प्रक्रिया में वनवृत्त बैतूल में 235 मस्टर रोल कर्मचारियों की वरीयता सूची तैयार की गई थी, जिसमें विजय राधेलाल सोनी का नाम क्रमांक 09 पर दर्ज था।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अप्रैल 1999 में वनवृत्त बैतूल में 108 कर्मचारियों का नियमितीकरण किया गया, लेकिन वरिष्ठता सूची में नाम होने के बावजूद विजय राधेलाल सोनी को नियमित नहीं किया गया। संजय सोनी का आरोप है कि नियमों के अनुसार अलग-अलग पदों की वरीयता सूची बननी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और केवल वनरक्षक के पदों पर ही नियमितीकरण किया गया, जबकि उस समय वाहन चालक के 6 पद और क्लीनर के 11 पद खाली थे।

संजय सोनी ने अपने आवेदन में कहा है कि उनके पिता से कनिष्ठ कर्मचारियों को नियमित कर दिया गया, जिससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा और लगातार प्रताड़ना के कारण 5 नवंबर 2001 को सुबह 11 बजे उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस घटना के बाद पूरा परिवार बिखर गया। उनके वृद्ध दादा-दादी का इलाज के अभाव में निधन हो गया, उनकी बुआ जो गूंगी-बहरी हैं, उन्हें कोई सहारा नहीं मिला, उनकी मां मानसिक रूप से आघात में चली गई और छोटे भाई की भी पानी में डूबकर मृत्यु हो गई।

संजय सोनी ने बताया कि वर्ष 2003 से लेकर 2015 तक कई बार आवेदन दिए गए और संगठन की ओर से भी लगातार ज्ञापन दिए जाते रहे, लेकिन आज तक न तो ग्रेच्युटी राशि दी गई, न ही परिवार के किसी सदस्य को दैनिक वेतन पर काम दिया गया और न ही किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वनवृत्त बैतूल में मृत कर्मचारियों के आश्रितों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के रिश्तेदारों को दैनिक वेतन पर काम दिया गया, लेकिन उनके परिवार को आज तक कोई मदद नहीं मिली।

– न तो समिति बनाई न ही पदवार अलग-अलग तैयार की सूची

आवेदक संजय सोनी ने बताया कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल के पत्र क्रमांक एफ 3/12101 दिनांक 11 दिसंबर 1998 के तहत भर्ती के लिए 10 बिंदुओं के स्पष्ट नियम जारी किए गए थे। इन नियमों के बिंदु 4 के अनुसार एक समिति बनना अनिवार्य था, जिसमें एक वन संरक्षक और दो वन मंडल अधिकारी शामिल रहते और योग्यता के आधार पर पदवार अलग-अलग वरीयता सूची तैयार की जाती। संजय सोनी का आरोप है कि वनवृत्त बैतूल में न तो यह समिति बनाई गई और न ही पदवार अलग-अलग सूची तैयार की गई, जिसके कारण उनके पिता विजय राधेलाल सोनी वाहन चालक के छह पद और क्लीनर के 11 पद रिक्त होने के बावजूद नियमित नहीं हो सके।

आवेदक ने शासन के 25 सितंबर 1998 और 11 दिसंबर 1998 के आदेशों का हवाला देते हुए पूरे मामले की जांच कराने, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने, ग्रेच्युटी राशि दिलाने, परिवार को दैनिक वेतन पर रोजगार देने और पारिवारिक हर्जा-खर्चा दिलाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर की शरण लेने के लिए मजबूर होंगे।

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