पहले हरे-भरे पेड़ काटे, अब पर्यावरण का पाठ पढ़ा रहे जिम्मेदार। विकास के नाम पर अंधा धुंध कटाई करने के बाद पर्यावरण बचाने के दावे।

बैतूल। शहर में विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर पिछले एक वर्ष में हजारों हरे-भरे और वर्षों पुराने पेड़ों को काट दिया गया। कॉलेज चौक और कारगिल चौक सहित कई स्थानों पर हरियाली को जमीनदोज कर दिया गया, लेकिन अब वही जिम्मेदार विभाग शहर में बड़े-बड़े फ्लेक्स लगाकर पर्यावरण संरक्षण की सीख दे रहा है। इस विरोधाभासी स्थिति पर शिवसेना के जिला अध्यक्ष विजेंद्र गोले ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाए हैं कि जब पेड़ काटे जा रहे थे तब पर्यावरण की चिंता कहां थी।
– कॉलेज चौक से कारगिल चौक तक हरियाली पर चली आरी
बैतूल नगर पालिका द्वारा इन दिनों कॉलेज चौक पर पुलिया निर्माण और शहर के सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के दौरान कॉलेज चौक, कारगिल चौक सहित कई प्रमुख स्थानों पर वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले लगभग एक वर्ष में हजारों पेड़ इस विकास कार्य की भेंट चढ़ चुके हैं। जिन पेड़ों ने वर्षों तक शहर को छाया और स्वच्छ हवा दी, वही पेड़ कुछ ही दिनों में जमीन पर ढेर होते नजर आए।
– पेड़ कटे, अब लग रहे पर्यावरण संरक्षण के फ्लेक्स
पेड़ों की कटाई के बाद शहर में अब पर्यावरण संरक्षण के संदेश देने वाले फ्लेक्स और पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इन फ्लेक्स में लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, प्रकृति की रक्षा करने और पर्यावरण को बचाने की अपील की जा रही है। एक फ्लेक्स में यह तक बताया गया है कि एक पौधा लगाने से 50 वर्षों में कितना लाभ मिलता है और लोगों से सात पौधे लगाने का आह्वान किया गया है। वहीं दूसरे फ्लेक्स में लिखा गया है कि पर्यावरण संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है और हर व्यक्ति को प्रकृति के अनुरूप जीवन शैली अपनानी चाहिए।
– शिवसेना जिला अध्यक्ष विजेंद्र गोले ने उठाए तीखे सवाल
इस पूरे मामले पर शिवसेना के जिला अध्यक्ष विजेंद्र गोले ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि एक तरफ शहर में वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है और दूसरी तरफ वही जिम्मेदार विभाग लोगों को पर्यावरण बचाने का पाठ पढ़ा रहा है। विजेंद्र गोले का कहना है कि यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही है जैसे सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली वाली कहावत। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पेड़ों की कटाई की जा रही थी तब पर्यावरण संरक्षण की बात क्यों नहीं की गई।
– फ्लेक्स में पर्यावरण की सीख, जमीन पर उलटी तस्वीर
शहर में लगाए गए फ्लेक्स में पर्यावरण के महत्व पर लंबा ज्ञान दिया जा रहा है। इनमें बताया गया है कि पौधे लगाकर धरती को हरा-भरा बनाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना ही सच्ची प्रगति है। लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। जहां एक ओर पेड़ों की कटाई से शहर की हरियाली तेजी से खत्म हो रही है, वहीं दूसरी ओर लोगों को पर्यावरण बचाने के संदेश दिए जा रहे हैं।
– लोगों के बीच चर्चा का विषय बना मामला
शहर में पेड़ों की कटाई और उसके बाद पर्यावरण संरक्षण के संदेश देने वाले फ्लेक्स लगने की घटना अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि वास्तव में पर्यावरण संरक्षण की चिंता है तो सबसे पहले शहर में हो रही अंधाधुंध पेड़ों की कटाई पर रोक लगनी चाहिए। इस मामले में अब लोगों की नजर नगर पालिका और जिम्मेदार अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।





