चित्रकला आत्म विश्वास को बढ़ाने में मदद करती हैं: प्राचार्य लिल्होरे
कन्या उ.मा. विद्यालय में आयोजित हुई बालसभा, छात्राओं ने जाना चित्रकला का महत्व

बैतूल। ई.एफ.ए. शा. कन्या उ.मा. विद्यालय, बैतूल गंज में 24 अगस्त शनिवार को एक विशेष बाल सभा का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं ने गौरवमयी भारत विषय पर चित्रकला के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को चित्रकला के विभिन्न आयामों से अवगत कराना था, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, वायु प्रदूषण, और मिट्टी संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चित्रकला गतिविधि आयोजित की गई।

प्रभारी शिक्षक महेश गुंजेले ने जानकारी देते हुए बताया कि कागज पर उकेरी गई आड़ी-तिरछी लकीरों को सुंदर कलाकृति में बदलने का सामर्थ्य केवल एक कलाकार में होता है। खाली कैनवास पर रंगों से कलाकारी का हुनर एक साधारण इंसान को चित्रकार बनाता है। इसी हुनर को छात्राओं तक पहुंचाने के लिए सी.सी.एल.ई. के अंतर्गत इस चित्रकला गतिविधि का संचालन किया गया।
बाल सभा के दौरान प्राचार्य ललितलाल लिल्होरे ने छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि चित्रकला गतिविधि रचनात्मकता का संचार करती है, छात्राओं में आत्मविश्वास भी बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि चित्रकला के प्रति रुचि जागृत होने से छात्राएं भविष्य में पेंटर और आर्किटेक्ट जैसे करियर के लिए भी तैयार हो सकती हैं। यह गतिविधि कौशल को सुधारने और आत्मविश्वास में वृद्धि करने में मददगार साबित होती है।

इस अवसर पर शिक्षिका शारदा सोंलकी ने छात्राओं को चित्रकला करते समय सावधानियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने चित्रकला में विषय के सही चयन, समय प्रबंधन, सामग्री के सही उपयोग, अनुपात और रचनात्मकता, धैर्य और शांति जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि चित्रकला को अंतिम रूप देने से पहले पुनः जांच करना आवश्यक है।
शिक्षिका कामायनी त्रिवेदी ने चित्रकला के प्रमुख तत्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रेखा, रंगों का संयोजन, रूप, स्पेस आदि चित्रकला के महत्वपूर्ण तत्व हैं। उन्होंने चित्रकला के लाभों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें रचनात्मकता का विकास, भावनात्मक अभिव्यक्ति, ध्यान केंद्रित करना, समस्या समाधान क्षमता, आत्मविश्वास में वृद्धि, धैर्य और सहनशीलता, संज्ञानात्मक विकास, समन्वय और मोटर स्किल्स, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक ज्ञान का विस्तार शामिल है।

बाल सभा में कक्षा शिक्षक सुनंदा उईके, सुजाता खान, शकुंतला पंडोले, रजनी राय, शारदा सोंलकी और कामायनी त्रिवेद्वी का विशेष सहयोग रहा। उल्लेखनीय है कि विद्यालय में प्रत्येक शनिवार को शासन के निर्देशानुसार प्रथम तीन कालखण्डों में बाल सभा का आयोजन किया जाता है, जिसमें छात्राओं की रचनात्मकता और शैक्षणिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता है।




