Essay writing competition organized: गुरू-शिष्य परंपरा पर निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित

बाल सभा में छात्राओं ने की उत्कृष्ट भागीदारी, नई पीढ़ी को कराया सांस्कृतिक धरोहर से अवगत


बैतूल। 21वीं शताब्दी के कौशल के अंतर्गत संचालित सतत् एवं व्यापक अधिगम तथा मूल्यांकन (सी.सी.एल.ई.) कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार, 20 जुलाई 2024 को ई.एफ.ए. शा. कन्या उ.मा. विद्यालय, बैतूल गंज में बाल सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छात्राओं ने गुरू-शिष्य परंपरा पर निबंध लेखन किया और आशुभाषण प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रभारी शिक्षक महेश गुंजेले ने बताया कि प्राचीन भारत में शिक्षा का केन्द्र गुरूकुल हुआ करते थे, जहां ज्ञान और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाता था। गुरूकुल शिक्षा प्रणाली ने न केवल विद्वानों और ऋषियों को जन्म दिया, बल्कि आदर्श नागरिकों और सदाचारी व्यक्तियों का निर्माण भी किया।विद्यालय में प्राचार्य ललितलाल लिल्होरे के मार्गदर्शन में 20 जुलाई और 21 जुलाई को गुरू पूर्णिमा उत्सव का आयोजन किया गया। प्रार्थना सभा में गुरू पूर्णिमा के महत्व और पारंपरिक गुरू-शिष्य संस्कृति पर शिक्षक वासुदेव काले ने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गुरू पूर्णिमा का पर्व महर्षि वेद व्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन और महाभारत की रचना की थी।
— सेवानिवृत शिक्षकों का सम्मान–
इस अवसर पर विद्यालय में सेवानिवृत शिक्षक के.बी. खान, वारिज त्रिपाठी, संध्या तावड़े और अमिता शुक्ला का सम्मान किया गया। शिक्षकों ने छात्राओं को अपने गुरू संस्मरण सुनाए और गुरू-शिष्य परंपरा के महत्व को समझाया। 21 जुलाई 2024 को विद्यालय में वीणा वादिनी मां सरस्वती का पूजन किया गया और गुरूजनों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर शिक्षक नर्मदा प्रसाद मिश्रा, डी. पवांर, वासुदेव काले और एस.पी. मोहबे ने अपने संस्मरण प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राएं और शिक्षक विशेष रूप से उपस्थित थे। विद्यालय के इस आयोजन ने गुरू-शिष्य परंपरा की महत्ता को पुनः स्थापित किया और नई पीढ़ी को इस सांस्कृतिक धरोहर से अवगत कराया।

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