State wide movement on 26th June: बैतूल में 26 जून को प्रदेश व्यापी आंदोलन, संपर्क एप बंद करने और आदेश वापस लेने की मांग

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन: 3 से 6 वर्ष के बच्चों के स्कूल प्रवेश पर रोक की मांग

बैतूल। प्रदेश व्यापी आंदोलन के तहत, बैतूल जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने संपर्क एप बंद करने और 3 से 6 वर्ष के बच्चों के स्कूलों में प्रवेश कराने के आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान, मुख्यमंत्री और आयुक्त महिला एवं बाल विकास के नाम बैतूल कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन सीटू की महासचिव पुष्पा वाईकर ने जानकारी दी कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद होने से बचाना और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को उजागर करना है। यूनियन की जिला अध्यक्ष सुनीता राजपाल ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि 3 से 6 वर्ष के बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाने का आदेश आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “यदि बच्चे स्कूलों में चले जाएंगे, तो आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चे नहीं आएंगे, जिससे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई होगी और अंततः केंद्रों को बंद कर दिया जाएगा।”

सुनीता राजपाल ने कहा, “सरकार की योजना है कि आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद कर कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भी हटाया जाए, यह एक सोची-समझी साजिश है। दूसरी ओर, संपर्क एप और पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से बार-बार जानकारी अपलोड करने की मांग ने कार्यकर्ताओं को परेशान कर रखा है। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी और एप के पासवर्ड बदलने जैसी समस्याएं इस परेशानी को और बढ़ा रही हैं।”

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बार-बार एप से जानकारी अपलोड न कर पाने के कारण अधिकारियों की फटकार और मानदेय में कटौती का सामना कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर समूचे मध्यप्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में रोष व्याप्त है, जिससे वे आंदोलन करने पर मजबूर हो गए हैं।

यूनियन की कार्यकारी अध्यक्ष सविता आर्य ने सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से 26 जून को 2 बजे तक बैतूल के कर्मचारी भवन के पास इकट्ठा होने की अपील की, जहां प्रदर्शन के बाद ज्ञापन सौंपा गया। अपील करने वालों में कोषाध्यक्ष संगीता कनाठे, सहायक महासचिव रेखा काले, उपाध्यक्ष योगिता शिवहरे, आशा सुरजे, पारो यादव, किरण सराठे, संगीता डेहरीया, सचिव इंद्रा भारव्दाज, गीता मालवीय, सोनम तायवाडे, सुनीता तिवारी और ललिता वर्मा शामिल थीं।

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