Big Crime News : प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस बैतूल के दो पूर्व प्राचार्य भी गबन के दोषी, पुलिस ने मामला दर्ज किया
बैतूल के प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस में गांव की बेटी एवं प्रतिभा किरण योजना में एक करोड़ 62 लाख रुपये का किया गबन

Big Crime News :बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल में स्थित प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस में गांव की बेटी एवं प्रतिभा किरण योजना की एक करोड़ 62 लाख रुपये की राशि का गबन करने के मामले में दो पूर्व प्राचार्यों काे भी जांच टीम ने दोषी पाया है। जांच टीम के प्रतिवेदन पर कालेज प्राचार्य के आवेदन पर पुलिस ने तीन कर्मचारियों समेत दो पूर्व प्राचार्याें पर भी मामला दर्ज कर लिया है।
कलेक्टर के द्वारा बनाए गए जांच दल के अंतरिम प्रतिवेदन के आधार पर कालेज की पूर्व प्राचार्य विजेता चौबे की शिकायत पर कालेज में कार्यरत कंप्यूटर आपरेटर दीपेश डहरिया, लिपिक सहायक ग्रेड-2 प्रकाश बंजारे और रिंकू पाटिल के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 409, 471, 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। जांच पूरी होने पर जो फरियादी थीं उन्हें भी पुलिस ने आरोपी बना दिया है। कालेज प्राचार्य मीनाक्षी चौबे की ओर से जांच प्रतिवेदन में कालेज के पूर्व प्राचार्य डा राकेश तिवारी एवं विजेता चौबे को भी दोषी पाए जाने का उल्लेख करते हुए कार्रवाई के लिए आवेदन दिया गया है। इस आधार पर प्रकरण में दोनों को आरोपी बनाया गया है। अब तक इस प्रकरण में पांच आरोपी बनाए जा चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस में वर्ष 2019-20 से लेकर वर्ष 2023-24 की अवधि में गांव की बेटी योजना के अलावा प्रतिभा किरण योजना में छात्राओं को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को अन्य लोगों के बैंक खातों में जमा कर गबन किया गया है। महालेखाकार ग्वालियर की टीम ने आडिट में इस गड़बड़ी को पकड़ा था। इसके बाद आयुक्त के निर्देश पर कलेक्टर ने जिला कोषालय अधिकारी के नेतृत्व में पांच सदस्यों की टीम बनाकर पूरे मामले की जांच कराई।16 दिसंबर से प्रारंभ की गई जांच पांच दिन में पूरी कर ली गई।
जांच टीम ने पाया है कि गांव की बेटी योजना का लाभ 5000 रुपये प्रतिवर्ष के मान से अधिकतम तीन वर्ष में 15000 रुपये की राशि प्रदाय की जाना था परंतु कुछ बैंक खातो में बार-बार 5000 रुपये की राशि का भुगतान किया गया। महालेखाकार मध्यप्रदेश ग्वालियर की आडिट रिपोर्ट में 95 खातों में 144.65 लाख रुपये का अनियमित भुगतान होना पाया गया था। गबन करने के लिए आरोपितों ने जिन लोगों के बैंक खातों में राशि जमा की है उनके छात्रवृत्ति पोर्टल से स्वीकृति आदेश ही नही हैं। देयको में कूटरचना कर वास्तविक लाभार्थी के स्थान पर अन्य व्यक्तियों को भुगतान कर शासन की राशि का गबन कर लिया गया।




