Shree Ram Nam: 13 घंटे तक 13 करोड़ बार राम का नाम जपने के लिए भक्त उमड़े

बैतूलबाजार में किया गया 13 घंटे में 13 करोड़ बार राम नाम जप करने का आयोजन

Shree Ram Nam: बैतूल। धार्मिक नगरी बैतूलबाजार में समर्थ सदगुरू श्रीमोहन महाराज के सानिध्य व प्रेरणा से प्रभु श्री राम जी की कृपा से एवं वीर हनुमान जी के सहयोग से गुरुवार को गुरु पुष्यामृत योग में 13 घंटे में 13 करोड़ संगीतमय राम नाम जप का आयोजन किया गया।सुबह आठ बजे प्रभु श्रीराम का पूजन करने और भगवान श्री हनुमान का आह्वान करने के साथ ही प्रारंभ किए गए राम नाम जप के लिए बड़ी संख्या में भक्त एकत्र हो गए थे।

 

आयोजन समिति के द्वारा बैतूलबाजार के सभी हिस्सों में लाउड स्पीकर लगाए गए थे ताकि आयोजन स्थल पर किए जा रहे जाप के साथ ही नगर में मौजूद हर व्यक्ति अपने घर, खेत, दुकान में ही बैठकर जाप कर सके।

इससे पूरे नगर में सुबह से रात्रि नौ बजे तक राम- राम का जयघोष गूंजता रहा।नगर के सरदार वल्लभभाई पटेल सामुदायिक मंगल भवन प्रांगण में भक्तों के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। महिलाओं के बैठने के लिए कुर्सी भी लगाई गईं थी ताकि जमीन पर बैठने में जिन्हें परेशानी है वे आराम से कुर्सी पर बैठकर जाप कर पाएं। सुबह आठ बजे से प्रारंभ हुए जाप में दोपहर तक यह स्थिति हो गई थी पंडाल के बाहर भी बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरूष बैठकर जाप करते रहे।

उत्साह और भक्ति में झूमते रहे भक्त:

राम-राम के जाप का उत्साह ऐसा था कि लगातार महिलाएं और पुरूष अपने स्थान पर ही खड़े होकर राम-राम का जाप करते हुए भक्ति में लीन हो रहे थे।महिलाओं के द्वारा भी राम नाम की भक्ति में उत्साह और उमंग के साथ नृत्य किया गया। आयोजन के मुख्य सूत्रधार राम पात्रीकर ने बताया कि सभी राम भक्तों के द्वारा आयोजन की हर व्यवस्था की जिम्मेदारी ली गई थी। इसका ही परिणाम रहा कि हर कार्य बेहद सुगमता के साथ संपन्न होता चला गया। कहीं पर भी भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

दिन भर चला भंडारा:

राम भक्तों की ऐसी आस्था रही कि राम नाम का जाप करने के लिए आने वाले भक्ताें को दिन भर भंडारा प्रसादी का वितरण किया जाता रहा। ठंड के कारण भक्तों को चाय पिलाने की व्यवस्था भी भक्तों के द्वारा की गई थी।सुबह से भंडारा प्रसादी बनाने का कार्य शुरू किया गया जिसमें नगर की महिलाआें ने कारसेवा करते हुए भक्तों की सेवा की। पानी पिलाने से लेकर सफाई तक का कार्य कारसेवकाें के द्वारा निस्वार्थ भाव से किया गया।

 

 

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