गणेश उत्सव: बैतूलबाजार में 350 वर्ष से श्रद्धा और उल्लास के साथ निभाई जा रही परंपरा

एक साथ पांच डोलों के साथ चल समारोह बन जाता है नगर में सर्व धर्म सद्भाव का केंद्र

✒️ लोकेश वर्मा की आंखों देखी रिपोर्ट
Betul News बैतूल। देश के कोने-कोने में श्री गणेश उत्सव बड़े हर्ष उल्लास से मनाया जा रहा है। जिले में भी गणेश उत्सव की धूम रहती है मगर सबसे परे “मंदिरों की नगरी” के नाम से विख्यात “बैतूल बाजार” के धार्मिक त्योहारों का अपना अलग ही आनंद है……।
आज के डिजिटल युग में गणेश पंडालों में लोक कलाओं की पूछ ही खत्म हो गई है। अब लगभग सभी पंडालों में ऊंची-ऊंची मूर्तियों और सजावट की होड़ के शोर ही रह गए हैं। लुप्त होती परंपराओं से परे “बैतूल बाजार” नगर में आज भी “गणेश उत्सव” बड़े ही भाव से पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है……।
नगर मे सर्वप्रथम गणेश उत्सव की शुरुआत “शिवाजी” के शासनकाल के समय से “पटेल परिवार” ने विगत 350 वर्षो के भी पहले से की जाते आ रही है। इनके अनुसार सन 1660 से जिसे पटेल परिवार की पीढ़ी आज पर्यंत तक बखूबी निभा रही है…..।
ऐसे ही नगर का “मुंशी परिवार”भी विगत 100 वर्षो से गणेश जी की स्थापना कर “उत्सव” बड़े धूमधाम से मानते आ रहा है……।
नगर के दोनों परिवार अपने घरों में ही “सुख -शांति और समृद्धि” का प्रतीक माना जाने वाले “सेंदूरी रंग” की “इको फ्रेंडली” प्रतिमा का निर्माण करते हैं। जो अपने आप में ही एक विशेष है ऐसी प्रतिमा और कहीं नहीं दिखाई देती……।
रात्रि में बस्ती के हर मोहल्ले में गणेश उत्सव की धूम देखी जा सकती है। कहीं भजन संध्या चल रही होती है, तो कहीं सुंदरकांड का पाठ और यहां की होने वाली “झांझ” आरती में हर कोई मंत्र मुग्ध हो जाता है। इस दरमियान यहां की “भजन मंडलियां ” इतनी व्यस्त होती हैं कि एक दिन में दो लोगों के घर जाकर भजन संध्या या सुंदरकांड का पाठ करती है। यहाँ के सैकड़ो लोगों को “सुंदरकांड” कंठस्थ याद है। यहां का विशेष हर घर में मिलने वाला धनिया “पंजीरी” का प्रसाद इसके “स्वाद और सुगंध” का कोई जोड़ नहीं है……।
बैतूल बाजार बस्ती में दशमी के दिन गणेश विसर्जन की परंपरा है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को “नूतन मंडल चौकीपुरा” आधुनिकता से परे वही पुराने ढंग से बखूबी निभाते रहा है…….।
पुरानी परंपरा अनुसार विसर्जन के लिए श्री गणेश जब डोले में सवार होकर एक के पीछे एक नगर में निकलते हैं तो मानो ऐसा लगता है साक्षात श्री गणेश नगर भ्रमण पर निकले हो….।
बस्ती के पांच “डोले” चौकीपुरा पर एकत्रित होते हैं और यहां से शुरू होता है बड़ा ही भव्य मुख्य चल समारोह डोलो के आगे “नूतन भजन मंडल” पुराने पारंपरिक भजनों की प्रस्तुति देते आगे चलता है। जिसमें बच्चे-बूढ़े- और जवान तीनों वर्गों के लोग एक साथ दिखाई देते हैं।
(नूतन मंडल की एक और विशेषता है- विजयदशमी के चल समारोह में चौकीपुरा पर “डिस्पोजल फ्री” स्वल्पाहार -जलपान सारे नगर को कराता आ रहा है। जिले का इतना बड़ा एकमात्र ऐसा भंडारा है जिसमें स्टील की प्लेट- चम्मच-गिलास में स्वल्पाहार- जलपान और कांच के गिलास में गरमा गरम चाय पिलाते है। जिसका नगर सहित आसपास के 10 हजार से भी ज्यादा लोग का आनंद लेते होंगे)
गणेश विसर्जन के चल समारोह में भजन मंडली के राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत शिक्षक श्री देवीप्रसाद जी वर्मा और चमन चौरसिया भैया दोनों की “दहाड़” के साथ “ढोलक की थाप” की जुगलबंदी, पवन भैया, मोनू भैया, दिलीप भैया, बबलू भैया एवं साथियों की “झांझ की झंकार” देखते बनती है। पूरे समय आदरणीय देवीप्रसाद जी वर्मा इस उम्र में भी झूम- झूम कर ढोलक बचाने के साथ भजन गाते चलते है।
 इन सबको एक सूत्र में पिरोने वाले “माता मंदिर बावली” के अनन्य सेवक चलते फिरते “विकिपीडिया” मेरे दिल अजीज परम आदरणीय प्रहलाद जी वर्मा का भजनों को झूला – झूल कर गायन मंत्र मुग्ध कर देता है। इनके साथ श्री नर्मदा प्रसाद चौधरी, श्री कृष्णकांत वर्मा, आदरणीय अधिवक्ता अशोक वर्मा  एवं साथी जब गरज कर “कोरस” करते हैं तो कई किलोमीटर तक आवाजे आती है……।
हमारे “लिंबाजी बाबा भजन मंडल मलकापुर” के संरक्षक आदरणीय गिरधारीलाल जी महतो बताया करते हैं, पहले चौकीपुरा के भजनों की आवाज 8 किलोमीटर दूर मलकापुर में सुनाई पडती थी। जिसे सुनकर वहां जाते थे। साथ ही आसपास के दर्जनों गांव के लोग चल समारोह देखने जाया करते थे…।
बाजार चौक पहुंचते पहुंचते चल समारोह और भी भव्य होता जाता है। नगर के नागरिक दौड़ दौड़ कर पानी पिलाते हैं तो स्वल्पाहार भी कराते है। गजब का सयोंग है बस्ती के विसर्जन घाट का नाम भी पूर्वजों ने “गणेश घाट” ही रखा है। नगर का ब्राम्हण समाज भी ऐसे ही भजन गाकर श्री गणेश को विदाई देता है…..।
मंडली के सदस्य बताते हैं कि पहले मार्ग के हर स्थान के अलग-अलग भजन निर्धारित होते थे। उस स्थान को डेडिकेट करते हुए पुराने बुजुर्गों वही भजन गाया करते थे…….।
इस वर्ष भी बड़े धूमधाम से रात्रि 11 बजे “श्री गणेश” का भव्य महाआरती के साथ सांपना नदी के घाट पर नगर परिषद की चाक चौबंद व्यवस्था से संपन्न हुआ। समापन से लौटते सभी भक्तो को श्री अनिल राठौर, श्री दिलीप राठौर ने स्वल्पाहार जलपान करा कर विदा किया।

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