Baba Mahakal: महाकाल की शाही नहीं अब ‘राजसी’ सवारी,सनातन धर्मावलंबियों के विरोध के बाद बदला गया शब्द

Baba Mahakal: बाबा महाकाल की अंतिम शाही सवारी के नाम को लेकर उठे विरोध के बाद जनसंपर्क विभाग द्वारा आज सोमवार को जारी प्रेस नोट में इसे राजसी सवारी लिखा है। उज्जैन के राजा और ब्रह्मांड के अधिपति महाकाल की सवारी को ‘शाही सवारी’ कहना विद्वानों, संस्कृतज्ञों, अखाड़ों के साधुओं व सनातन धर्मावलंबियों के विरोध का कारण बन गया था।
सनातन धर्मावलंबियों का मत है कि ‘शाही’ शब्द में इस्लामिक आक्रांताओं और राजशाही की बू आती है। इस कारण महाकाल की सवारी को ‘शाही सवारी’ न कहा जाए। इसके स्थान पर संस्कृत या हिंदी का कोई उपयुक्त शब्द प्रचलन में लाया जाए।विरोध के बाद जनसंपर्क विभाग द्वारा आज सोमवार को जारी प्रेस नोट में इसे राजसी सवारी लिखा है।
उल्लेखनीय है कि श्रावण-भादौ मास के प्रत्येक सोमवार को महाकाल की सवारी निकलती है। इसमें महाकाल पालकी में सवार होकर प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। महाकाल की अंतिम सवारी सबसे भव्य होती है, इसलिए इसे शाही सवारी कहा जाता रहा है। इसे शाही कहने पर संतों, विद्वानों और अखाड़ों के साधुओं में असहमति व आक्रोश पनप गया था।
सभी का कहना है कि जिस महाकालेश्वर मंदिर पर वर्ष 1234 में क्रूर इस्लामिक शासक इल्तुतमिश ने हमला किया और कत्लेआम मचाया, उसी इस्लाम मत के शब्द शाही को महाकाल की सवारी से जोड़ना गलत है। अत: इसे अविलंब हटाकर संस्कृत या हिंदी का ऐसा शब्द जोड़ा जाए, जो सवारी की पवित्रता व भव्यता को सही अर्थों में व्यक्त कर सके।अंतत: शाही शब्द को समाप्त कर अब महाकाल की राजसी सवारी कहा जाने लगा है।




