Revenue officials protested against the division of courts: न्यायालयों के बंटवारे को लेकर राजस्व अधिकारियों ने जताया विरोध
एडीएम बैतूल को सौंपा ज्ञापन, बोले- बिना विधिक संशोधन और संसाधनों के ऐसे आदेश अमान्य, 21 जुलाई से विरोध की चेतावनी

बैतूल। मध्य प्रदेश के राजस्व अधिकारियों में न्यायालयीन और गैर-न्यायालयीन कर्तव्यों के मनमाने बंटवारे को लेकर जबरदस्त असंतोष उभर आया है। इसको लेकर मध्य प्रदेश राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ के जिला अध्यक्ष गोवर्धन पाठे तहसीलदार बैतूल के नेतृत्व में जिला इकाई बैतूल द्वारा गुरुवार 17 जुलाई को मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन, मंत्रालय वल्लभ भवन, भोपाल एवं प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग के नाम अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से शासन से मांग की गई है कि जब तक पूर्ण विधिक संशोधन और आवश्यक संरचनात्मक सुदृढ़ता नहीं हो जाती, तब तक इस योजना को लागू करने की जल्दबाजी न की जाए।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 11 जून 2025 को हुई राजस्व विभाग की वीडियो कांफ्रेंस और 10 जुलाई 2025 को प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय से जारी आदेशों के माध्यम से जिलों में न्यायालयीन और गैर-न्यायालयीन कर्तव्यों का जो विभाजन प्रस्तावित किया गया है, वह विधि, व्यावहारिकता और प्रशासनिक सिद्धांतों के प्रतिकूल है। संघ ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि इस विभाजन के लिए न तो कोई अध्ययन हुआ है, न ही किसी समिति की सिफारिशें हैं, और न ही कोई उद्देश्य घोषित किया गया है। यह भी सवाल उठाया गया कि इस विभाजन से कार्यक्षमता कैसे बढ़ेगी, इसका कोई तर्क या डेटा सामने नहीं रखा गया।
– किसानों और आमजन को न्याय से दूर किया जा रहा
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि तहसीलों के न्यायालयों की संख्या घटाकर किसानों और आमजन को न्याय से दूर किया जा रहा है, जबकि आवश्यकता इस बात की थी कि इन न्यायालयों को अधिक संसाधन देकर और अधिक प्रभावी बनाया जाता। इसके अलावा, संघ ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के अनुसार कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति का अधिकार राज्य शासन के पास है, न कि जिला कलेक्टरों के पास। इसके बावजूद, जबलपुर और सिवनी जैसे जिलों में जिला कलेक्टरों द्वारा अधिकारातीत तरीके से नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिसकी प्रतियां भी ज्ञापन के साथ संलग्न की गई हैं। साथ ही, नए कार्य विभाजन में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त अधिकारियों को बैठने की जगह, स्टाफ, संसाधन, अदालत संचालन की व्यवस्था आदि के बारे में कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं। यह पूरी प्रक्रिया अव्यवस्थित और अवैधानिक प्रतीत होती है।
– 21 जुलाई से विरोध प्रदर्शन का ऐलान
संघ ने यह भी दोहराया कि यदि प्रशासन नवाचार करना चाहता है, तो पहले इसकी पायलट परियोजना दो जिलों में लागू कर प्रभाव का आंकलन करे और फिर विधिक संशोधन के साथ पूरे प्रदेश में इसे लागू किया जाए। यदि शासन ने इन निर्देशों को तत्काल प्रभाव से स्थगित नहीं किया और पर्याप्त मानव संसाधन तथा भौतिक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए, तो संघ 21 जुलाई 2025 को समस्त कार्यों से विरत रहकर जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करेगा और आगे की लोकतांत्रिक कार्यवाही पर निर्णय लेगा। ज्ञापन देने वालों में तहसीलदार भैंसदेही भगवानदास कुमरे, तहसीलदार घोड़ाडोंगरी संतोष पथोरिया, तहसीलदार चिचोली डॉली रैकवार, तहसीलदार प्रभातपट्टन यशवंत गिन्नारे, आठनेर तहसीलदार कीर्ति डेहरिया, आमला तहसीलदार ऋचा कौरव एवं नायब तहसीलदार बैतूल बाजार पूनम साहू, श्यामसिंग नायब तसीलदार बैतूल 2, बसंत कुमार बर्खानिया तहसीलदार भीमपुर, संजय बरैया तहसीलदार मुलताई, ठेबड़ा विस्के तहसीलदार शाहपुर उपस्थित रहे।




