privatization of district hospital: जिला चिकित्सालय का निजीकरण गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अत्यंत हानिकारक: शैलेष कुमार वाईकर 

गरीबों के हित में सरकार से पुनर्विचार की मांग, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

बैतूल। आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष शैलेष कुमार वाईकर ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए बैतूल जिला चिकित्सालय को निजी हाथों में देने के निर्णय का विरोध किया है। उन्होंने यह ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर को सौंपा और कहा कि यह फैसला जिले के गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अत्यंत हानिकारक होगा।

ज्ञापन में वाईकर ने बताया कि बैतूल जिला चिकित्सालय वर्तमान में शासन द्वारा संचालित है और यहां गरीब, पिछड़े और मध्यम वर्ग के लोगों को मुफ्त में इलाज की सुविधा मिलती है। लेकिन हाल ही में सामने आए निर्णय के अनुसार, सरकार अस्पताल को (पीपीपी) मोड में निजी मेडिकल कॉलेज संचालकों के हाथों में सौंपने की योजना बना रही है। वाईकर ने इस फैसले को बैतूल की जनता के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि जिला अस्पताल में पहले से ही वार्ड और बेड की संख्या बेहद कम है जबकि यहां मरीजों की संख्या अधिक होती है।

उन्होंने बताया कि इस नई नीति के अनुसार, जिला अस्पताल के 25 प्रतिशत बेड निजी अस्पताल की तर्ज पर संचालित होंगे, जहां इलाज के लिए मरीजों से शुल्क लिया जाएगा। वर्तमान में अस्पताल में करीब 300 बेड हैं, जिसमें से यदि 25 प्रतिशत बेड निजी तौर पर संचालित किए जाते हैं, तो केवल 225 बेड ही शासकीय रूप से संचालित रहेंगे, जहां गरीब और जरूरतमंद मरीजों का मुफ्त इलाज हो सकेगा। उन्होंने कहा कि 225 बेड के बाद आने वाले मरीजों को या तो निजी वार्ड का शुल्क देना पड़ेगा या फिर निजी अस्पताल में इलाज करवाना पड़ेगा, जिससे गरीबों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

वाईकर ने इस पर भी सवाल उठाया कि निजीकरण के बाद अस्पताल में फोरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी कार्यों में पारदर्शिता की कमी आ सकती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आवश्यक सेवाएं हर व्यक्ति का अधिकार हैं और दिल्ली व पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकारों द्वारा सभी नागरिकों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाती है। मध्य प्रदेश में इस तरह का निजीकरण गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए समस्याएं खड़ी करेगा।

उन्होंने यह भी चिंता जताई कि निजी संचालन में शासकीय डॉक्टर और अन्य स्टाफ किसके अधीन कार्य करेंगे और वर्तमान में अस्पताल में उपलब्ध मशीनों और अन्य सुविधाओं पर भी शुल्क लिया जाएगा। इस प्रकार, गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने जिला चिकित्सालय के लिए जारी किए गए 25 नवंबर 2024 के टेंडर को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की और अस्पताल को शासकीय रूप से ही संचालित करने का आग्रह किया ताकि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें। इस ज्ञापन के माध्यम से शैलेष कुमार वाईकर ने स्पष्ट किया कि अगर जिला चिकित्सालय को निजीकरण के तहत संचालित किया गया, तो आम आदमी पार्टी इसका कड़ा विरोध करेगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन भी करेगी।

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