रैशनल यूज़ ऑफ ब्लड एंड ब्लड कंपोनेंट्स पर सीएमई का आयोजन ।
स्वास्थ्य विभाग और आईएमए का संयुक्त आयोजन ।

बैतूल। मध्यप्रदेश शासन, स्वास्थ्य विभाग एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में होटल ग्रीन पार्क में सीएमई का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल मध्य प्रदेश की डिप्टी डायरेक्टर डॉ रूबी खान उपस्थित थी। उनके अलावा विशेषज्ञ के रूप में पाढर हॉस्पिटल की एमडी पैथोलॉजी डॉक्टर लिसा चौधरी ने रैशनल यूज़ ऑफ ब्लड एंड ब्लड कंपोनेंट्स विषय पर प्रकाश डाला।
डिप्टी डायरेक्टर डॉ रूबी खान ने बताया कि वर्तमान में संपूर्ण ब्लड की बजाय कंपोनेंट थेरेपी को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि मरीज को आवश्यकता अनुसार ही संबंधित घटक दिया जा सके।
उन्होंने बताया कि ब्लड को मुख्य रूप से पैक्ड रेड ब्लड सेल्स, फ्रेश फ्रोजन प्लाज़्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसिपिटेट में विभाजित किया जाता है। पैक्ड रेड ब्लड सेल्स का उपयोग गंभीर एनीमिया, प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव, सर्जरी या दुर्घटना के मामलों में किया जाता है। इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लगभग 35 से 42 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
फ्रेश फ्रोजन प्लाज़्मा का उपयोग रक्त के थक्के बनने से संबंधित विकारों में किया जाता है। इसे माइनस 30 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान पर एक वर्ष तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
प्लेटलेट्स डेंगू, कीमोथेरेपी या प्लेटलेट्स की कमी वाले मरीजों को दिए जाते हैं। इन्हें 20 से 24 डिग्री सेल्सियस पर पांच दिनों तक संरक्षित किया जाता है।
क्रायोप्रेसिपिटेट का उपयोग फाइब्रिनोजेन की कमी या विशेष रक्त विकारों में किया जाता है।

डॉ रूबी खान ने बताया कि ट्रांसफ्यूजन के दौरान सावधानी बरतें ब्लड बैंक से कंपोनेंट इशू होने के बाद 30 मिनट के भीतर मरीज को चढ़ाना शुरू कर देना चाहिए, ताकि संक्रमण या अन्य जटिलताओं का खतरा न रहे। ट्रांसफ्यूजन से पहले मरीज की पहचान, ब्लड ग्रुप और क्रॉस मैच की पुष्टि करना अनिवार्य है।
डॉ लिसा चौधरी ने बताया कि स्थिर मरीजों में हीमोग्लोबिन 7 ग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे कम होने पर रक्त चढ़ाने पर विचार किया जाता है, जबकि हृदय रोग, लक्षणयुक्त एनीमिया या सर्जरी की स्थिति में यह सीमा 8 से 9 ग्राम तक हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्त चढ़ाने का निर्णय केवल हीमोग्लोबिन स्तर के आधार पर नहीं, मरीज की समग्र क्लिनिकल स्थिति और लक्षणों को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।
इस मौके पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं विधायक डॉ.योगेश पंडाग्रे, विधायक प्रतिनिधि स्वास्थ्य डॉ.अशोक बारंगा, सीएमएचओ डॉ मनोज हुरमाड़े, सिविल सर्जन डॉ जगदीश घोरे, रक्त कोष अधिकारी एवं सिकल सेल उन्मूलन कार्यक्रम की जिला नोडल अधिकारी डॉ.अंकिता सीते, डॉ मनीष लश्करे, डॉ दीप्ति राठी, डॉ दीप साहू सहित बड़ी संख्या डाक्टर मौजूद थे।




