श्रावण के पहले सोमवार मोहगांव हवेली का अर्धनारीश्वर धाम बना श्रद्धा का केंद्र, शिव और शक्ति एक ही स्वरूप में है विराजमान

शिव-शक्ति के अद्वितीय स्वरूप के दर्शन को दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु

श्रावण के पहले सोमवार मोहगांव हवेली का अर्धनारीश्वर धाम बना श्रद्धा का केंद्र
शिव और शक्ति एक ही स्वरूप में है विराजमान
शिव-शक्ति के अद्वितीय स्वरूप के दर्शन को दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु
मां ताप्ती जागृति समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामकिशोर पवार ने बैतूल जिले से पवित्र मां ताप्ती का जल लेकर अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचकर भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक किया।
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बैतूल। श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले की सौसर तहसील स्थित मोहगांव हवेली का अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सरपणी नदी के पावन तट पर स्थित यह प्राचीन धार्मिक स्थल अपनी अनूठी लोककथा, आध्यात्मिक महत्व और शिव-शक्ति के अद्वितीय अर्धनारीश्वर स्वरूप के कारण दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र माना जाता है।
मां ताप्ती जागृति समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामकिशोर पवार ने बैतूल जिले से पवित्र मां ताप्ती का जल लेकर अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचकर भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक किया। उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना करते हुए श्रद्धा एवं आस्था के साथ पूजा-अर्चना की।
स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य ने सरपणी नदी के किनारे कठोर तपस्या की थी। उनकी कठिन साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव माता पार्वती सहित अर्धनारीश्वर स्वरूप में प्रकट हुए। इसके बाद शुक्राचार्य ने इसी पावन स्थल पर शिवलिंग की स्थापना कर विधिवत पूजा-अर्चना की। तभी से यह स्थान अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध हो गया और क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक तीर्थों में इसकी पहचान बनी।
अर्धनारीश्वर स्वरूप को सनातन परंपरा में शिव और शक्ति की अभिन्न एकता का प्रतीक माना जाता है। यह स्वरूप सृष्टि में स्त्री और पुरुष, ऊर्जा और चेतना तथा प्रकृति और पुरुष के संतुलन का संदेश देता है। यही कारण है कि यह मंदिर आध्यात्मिक दर्शन और जीवन संतुलन की भावना का भी केंद्र माना जाता है।
सरपणी नदी के तट पर स्थित इस मंदिर की एक विशेष पहचान यह भी है कि स्थानीय परंपरा में इसे साढ़े बारहवाँ ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। मंदिर परिसर में बारह ज्योतिर्लिंगों के प्रतीकात्मक स्वरूप तथा चार धाम की प्रतिकृतियां भी स्थापित बताई जाती हैं। महाशिवरात्रि, श्रावण मास और सोमवती अमावस्या के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना के साथ विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान अर्धनारीश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्राचार्य द्वारा शिवलिंग स्थापना की कथा स्थानीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके समर्थन में प्राचीन अभिलेखीय अथवा पुरातात्त्विक प्रमाण व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसी प्रकार भारत में मान्य पारंपरिक 12 ज्योतिर्लिंगों की सूची में भी इस मंदिर का नाम शामिल नहीं है। इसके बावजूद क्षेत्रीय आस्था में मोहगांव हवेली का अर्धनारीश्वर धाम अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है और हजारों श्रद्धालु इसे अटूट श्रद्धा के साथ अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजते हैं।

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