Municipal negligence: नगरपालिका की लापरवाही से बैतूल की अवैध कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं का संकट

अवैध कॉलोनियों में अधोसंरचना का अभाव: एक साल बाद भी अंतिम ले-आउट का प्रकाशन अधूरा

बैतूल वर्ष 2016 के पूर्व की अवैध कॉलोनियों को वैध करने की मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद नगर पालिका ने अवैध कॉलोनियों में नागरिक अधोसंरचना प्रदान करने के लिए सर्वे तो करा लिया, लेकिन एक साल बाद भी ले-आउट का अंतिम प्रकाशन नहीं हो सका है। इस कारण से इन कॉलोनियों में रह रहे निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर बारिश के मौसम में। बैतूल शहरी क्षेत्र में कुल 93 अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई थी। इन कॉलोनियों में सड़क, नाली, बिजली, और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए नगरपालिका ने सर्वे कराया और स्टीमेट एवं ले-आउट तैयार किए थे। पहले तीन चरणों में सार्वजनिक सूचना, कॉलोनियों का प्रकाशन, और ले-आउट व स्टीमेट का प्रकाशन किया गया था, लेकिन चौथा और अंतिम प्रकाशन अब तक नहीं हो सका है। बारिश शुरू होने के कारण इन कॉलोनियों में सड़क और नाली की समस्या बढ़ गई है, जिससे निवासी सीएम हेल्पलाइन में शिकायत कर रहे हैं। भवन अनुज्ञा की अनुमति न मिलने से प्लॉट मालिक भी परेशान हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि 2016 के पूर्व की सभी कॉलोनियों को वैध किया जाएगा और बाद में 2022 तक बनी कॉलोनियों को भी वैध करने की बात कही, लेकिन इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं किए गए। लोगों का कहना है कि अवैध कॉलोनियों के सर्वे को एक साल हो चुका है, लेकिन अभी तक नगरपालिका मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाई है। पिछले साल सर्वे कराकर ले-आउट का प्रकाशन कराया गया था, लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनावों के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया। नगरपालिका के अधिकारियों के हस्ताक्षर न होने के कारण स्टीमेट और ले-आउट की फाइलें अभी भी लंबित हैं। 93 अवैध कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए टेंडर भी कॉल किए गए थे, लेकिन प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।नीरज धुर्वे, एई नगरपालिका बैतूल ने कहा,सभी अवैध कॉलोनियों का सर्वे कराकर स्टीमेट और ले-आउट तैयार कर लिए गए हैं। तीन बार प्रकाशन हो चुका है। अंतिम प्रकाशन होना बाकी है। प्रक्रिया पूर्ण कर जल्द ही प्रकाशन कराया जाएगा।

 

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