Digital Arrest : बैतूल के युवा को डिजिटल अरेस्ट करने का प्रयास,डार्क वैब में संदिग्ध मैसेज भेजने का दोषी बताकर धमकाया

सतर्कता बरतते हुए युवक ने साइबर सेल से की शिकायत, जांच में ठगी के प्रयास का हुआ खुलासा

Digital Arrest : बैतूल। साइबर ठगी का जाल तेजी से फैल रहा है। मंगलवार को मध्यप्रदेश के बैतूल में भी व्यापारी को अज्ञात नंबर से काल कर डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से ठगी का शिकार बनाने का प्रयास किया गया। उन्होंने तत्काल ही पुलिस के पास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई तो मामला आनलाइन ठगी के प्रयास का पाया गया। बैतूल निवासी हितेश मालवीय ने साइबर सेल पहुंचकर पुलिस को बताया कि उन्हें मंगलवार दोपहर में अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि उनका मोबाइल नंबर डार्क वैब में उपयोग किया जा रहा है और उससे संदिग्ध मैसेज भेजे जा रहे हैं। आपका आधार कार्ड गलत जगह उपयोग किया जा रहा है।इसके लिए आपके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।

दो घंटे में हैदराबाद बुलाया:

साइबर ठगी करने वालों ने हितेश को दो घंटे के भीतर हैदराबाद पहुंचकर सफाई देने के लिए धमकाया। हैदराबाद न आने पर ठगों ने वीडियो काल पर स्टेटमेंट देने के लिए कहा। उसी नंबर से हितेश को वीडियो काल किया और अकेले में बात करने के लिए दबाव बनाने लगे। हितेश को ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने काल कट कर दी और सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय में साइबर सेल पहुंचकर शिकायत की। साइबर सेल से जांच की गई तो पाया गया कि उनके साथ ठगी का प्रयास किया गया है।

एसपी ने की सतर्कता की अपील:

पुलिस अधीक्षक निश्चल एन झारिया ने बताया कि हितेश मालवीय ने सतर्कता बरतते हुए सबसे पहले पुलिस को सूचना दी। इससे वे किसी भी प्रकार की ठगी का शिकार होने से बच गए। डिजिटल अरेस्ट एक आनलाइन धोखाधड़ी है, जिसमें ठग खुद को कानून प्रवर्तन या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। ठग ईमेल, टेक्स्ट मैसेज, या फ़ोन काल के जरिए संपर्क करते हैं। वे दावा करते हैं कि आपके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है या आप साइबर अपराध की जांच में संदिग्ध हैं। डराने के लिए फर्जी आडियो/वीडियो काल का इस्तेमाल करते हैं। झूठे आरोप लगाकर तुरंत पैसे देने का दबाव डालते हैं।

तत्काल पुलिस की मदद लें:

पुलिस अधीक्षक ने आम जन से अपील की है कि किसी भी अनजान काल या मैसेज पर निजी जानकारी न साझा करें।यदि कोई खुद को पुलिस या कानूनी अधिकारी बताकर धमकाता है, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन (112) पर काल करें।आधिकारिक तौर पर पुलिस कभी भी फोन पर भुगतान या व्यक्तिगत जानकारी की मांग नहीं करती।इस प्रकार की घटनाओं की तुरंत साइबर सेल या नजदीकी थाने में रिपोर्ट करें। जागरूक रहें और ठगों के जाल में फंसने से बचें।

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