जबलपुर की 8 दुल दुल घोड़ी और मयूर नृत्य बढ़ाएंगे शिव बारात की भव्यता

50 कलाकारों के साथ भारत धमाल ग्रुप की संगीतमय प्रस्तुति बनेगी आकर्षण

बैतूल से लेकर बड़े शहरों तक पहचान बना चुके दल होंगे शामिल

बैतूल। 15 फरवरी को निकलने वाली देवाधिदेव भोलेनाथ की दिव्य शिव बारात इस बार और भी भव्य और आकर्षक रूप में नजर आएगी। श्री शंभू भोले सेवा उत्सव समिति के सदस्य बिट्टू ठाकुर ने बताया कि जबलपुर की प्रसिद्ध 8 दुल दुल घोड़ी और मनमोहक मयूर नृत्य की प्रस्तुति शिव बारात में विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। यह दल राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है और विभिन्न मंचों पर अपनी प्रस्तुति से ख्याति अर्जित कर चुका है।

बिट्टू ठाकुर ने बताया कि पारंपरिक साज-सज्जा और कलात्मक प्रस्तुति के साथ 8 दुल दुल घोड़ी दल शिव बारात में शामिल होगा। इसके साथ मयूर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी। समिति का मानना है कि इस प्रस्तुति से बारात का धार्मिक उल्लास और भी बढ़ेगा।

– भारत धमाल ग्रुप के 50 कलाकार देंगे भजनों की संगीतमय प्रस्तुति

समिति के अनुसार बैतूल का प्रसिद्ध भारत धमाल ग्रुप अपने 50 साथियों के साथ धार्मिक भजनों की संगीतमय प्रस्तुतियां देगा। यह ग्रुप अजमेर, इंदौर, गोंदिया और नागपुर जैसे बड़े शहरों में अपनी प्रस्तुतियों से पहचान बना चुका है और अब शिव बारात में भक्ति संगीत की विशेष छटा बिखेरेगा।

– जय सेवा डंडार मण्डल मरकढ़ाना निभाएगा आदिवासी संस्कृति का दायित्व

समिति के निक्की ठाकुर ने बताया कि जय सेवा डंडार मण्डल मरकढ़ाना तहसील घोड़ाडोंगरी एक आदिवासी लोकनृत्य मंडल है। यह मंडल हरियाली अमावस्या यानी जिरौती त्यौहार के आसपास अपने नृत्य की शुरुआत करता था और दीपावली तक इसे संपन्न करता था, लेकिन अब आदिवासी परंपरा को मजबूती देने और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से जिले की लगभग सभी तहसीलों में आयोजित डंडार प्रतियोगिताओं में भाग लेता है।

डंडार प्रतियोगिताओं में लगातार प्रथम पुरस्कार प्राप्त

निक्की ठाकुर ने बताया कि जय सेवा डंडार मण्डल मरकढ़ाना ने ग्राम नरेरा में आयोजित डंडार प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। इसके बाद मोहनढाना, बारगवाड़ी, दूल्हारा, सारनी, मलाजपुर, रतनपुर, नहरपुर, बटकी, भीमपुर और बैतूल सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित प्रतियोगिताओं में अपनी प्रस्तुति के आधार पर पुरस्कृत हुआ। शिव बारात में यह मंडल आदिवासी लोकसंस्कृति की सशक्त प्रस्तुति देगा।

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