चेक बाउंस मामले में ऋणी को सश्रम कारावास की सजा, बैंक में राशि जमा करने का आदेश
मप्र ग्रामीण बैंक से लिया था ऋण, कोर्ट ने सुनाया जेल और जुर्माने का फैसला

बैतूल। मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक बैतूल द्वारा दर्ज कराए गए एक चेक बाउंस मामले में न्यायालय ने टिकारी बैतूल निवासी संतोष पाल पिता तेजीलाल पाल को एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी को बैंक को 607386 रुपये की राशि दो माह के भीतर जमा करने का आदेश दिया गया है। यदि वह समय पर राशि जमा नहीं करता है तो उसे दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
जानकारी के अनुसार आरोपी संतोष तेजीलाल पाल ने मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक बैतूल से मुद्रा योजना के अंतर्गत डेयरी व्यवसाय हेतु कुल 606000 रुपये का ऋण लिया था। बैंक द्वारा ऋण की वसूली की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर आरोपी ने शाखा प्रबंधक रोशनी पानकर पानसरे को 536952.02 रुपए का चेक सौंपा था। जब यह चेक बैंक में जमा किया गया तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया।
इसके बाद बैंक द्वारा आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसका उसने कोई जवाब नहीं दिया। अंततः बैंक ने आरोपी के विरुद्ध बैतूल न्यायालय में धारा 138 एनआई एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कराया। इस प्रकरण में न्यायालय द्वारा दिनांक 04 मई 2026 को निर्णय सुनाया गया, जिसमें आरोपी को दोषी मानते हुए एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा और 607386 रुपए की वसूली का आदेश पारित किया गया।
प्रकरण में बैंक के पैनल अधिवक्ता अनुराग मिश्रा एवं दिनेश नागले द्वारा प्रभावी पैरवी की गई एवं बैंक की शाखा प्रबंधक श्रीमती रोशनी पानकर द्वारा न्यायालय की संतुष्टि योग्य साक्ष्य पेश की गई। बताया जा रहा है कि जिले में ऐसे कई प्रकरण सामने आ रहे हैं, जिनमें हितग्राही बैंक से लोन तो ले लेते हैं, लेकिन बाद में उसे चुकाने की जिम्मेदारी नहीं निभाते। बैंक द्वारा लगातार नोटिस और समझाइश के बाद भी राशि नहीं चुकाने पर मामला न्यायालय तक पहुंचता है और अंततः ऋणी को जेल की सजा भुगतनी पड़ती है।




