बगलामुखी और महादेव की साधना से ही मानवता की रक्षा संभव : देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी
खेड़ीकोर्ट में 5 दिवसीय त्रिकालदर्शी माँ बगलामुखी दिव्य दरबार का भव्य समापन

सनातन पर संकट का समाधान आध्यात्मिक शक्ति में : देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी
सैकड़ों श्रद्धालुओं को दी गई बगलामुखी दीक्षा, घर-घर होंगे यज्ञ
बैतूल। श्री गोरखनाथ मठ की पावन तपोभूमि खेड़ीकोर्ट में आयोजित 5 दिवसीय त्रिकालदर्शी मां बगलामुखी दिव्य दरबार का भव्य एवं सफल समापन हुआ। इस अवसर पर मां बगलामुखी साधिका देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी जी ने कहा कि मां पीताम्बरा बगलामुखी और महादेव की शरण में आकर ही सनातन धर्म और सम्पूर्ण मानवता की रक्षा संभव है। उन्होंने कहा कि यह दिव्य दरबार भक्तों के लिए कल्पवृक्ष के समान है, जो सात्त्विक मनोकामनाओं की पूर्ति करता है। सनातन परंपरा में मां बगलामुखी को श्री, विजय और सद्बुद्धि की देवी माना गया है तथा महादेव के साथ साधना से साधक को विजय, ऐश्वर्य, शक्ति और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी जी ने बताया कि भगवान परशुराम प्रथम महान साधक थे, जिन्होंने यह साधना-रहस्य भगवान ब्रह्मा, श्री विष्णु, देवर्षि नारद, दुर्वासा, विश्वामित्र, श्रीराम, योगेश्वर श्रीकृष्ण, भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण को प्रदान किया। रावण, कुम्भकर्ण और इंद्रजीत मेघनाथ भी उपासक रहे हैं।
आचार्य रविन्द्र मानकर के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य संकल्पकर्ता वासुदेव ताड़गे और आयोजक देवशंकर धोटे ने भी संबोधित किया। खेड़ीकोर्ट, निमनवाड़ा और सोनखेड़ी सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं को दीक्षा दी जा रही है तथा घर-घर बगलामुखी यज्ञ कराए जा रहे हैं। मुलताई, बैतूल, आमला, बोरदेही, हिवरखेड़, आष्टा, बिरुल बाजार, टेमुरनी, जामठी और मोही से श्रद्धालु पहुंचे। देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी जी ने तपोभूमि के प्रवेश द्वार पर मांस-मदिरा दुकानों को हटाने और विशाल महायज्ञ कराने का संकल्प भी व्यक्त किया।




