तीन साल पहले 42 साल बाद बैतूल लौटे थे पूर्व कलेक्टर पी राघवन, यादों में हुए भावुक।
1977-79 के दौर में बैतूल कलेक्टर रहे थे राघवन, मुक्तागिरी मंदिर दर्शन के बाद हुआ था सागर तबादला, साझा किया अनुभव। दामजीपुरा को सड़क और बस सेवा से जोड़ने का श्रेय राघवन को।

बैतूल। दक्षिण भारत के तमिलनाडु निवासी और बैतूल के पूर्व कलेक्टर रहे पी राघवन तीन साल पहले 2026 में 42 साल बाद फिर बैतूल पहुंचे तो पुरानी यादों में डूबकर भावुक हो गए थे। उन्होंने यहां तक कहा था कि एक समय उनके मन में बैतूल में ही बस जाने का विचार आया था। उनकी पत्नी ने भी उस समय उनसे पूछा था कि यहां खाना कौन बनाएगा, जिस पर राघवन ने कहा था कि वे थोड़ा-बहुत बना लेते हैं और यहां के लोग इतने अच्छे हैं कि कोई भी मदद कर देगा।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी पी राघवन बैतूल में 30 अक्टूबर 1977 से 11 जून 1979 तक कलेक्टर रहे। उनके कार्यकाल को जिले में स्वर्णिम दौर माना जाता है। उन्होंने पहली बार 300 ग्राम पंचायतों के सरपंचों का तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित कराया था। साथ ही दामजीपुरा को सड़क मार्ग से जोड़ने और वहां तक बस सेवा शुरू कराने का श्रेय भी उन्हें जाता है।
तीन साल पहले 26 मार्च 2023 को बैतूल प्रवास के दौरान उनका सर्किट हाउस में सादगीपूर्ण कार्यक्रम में शाल-श्रीफल से सम्मान किया गया था। उस कार्यक्रम में बैतूल सुधार न्यास के पूर्व अध्यक्ष राजीव खंडेलवाल, अधिवक्ता उत्तम दीक्षित और सेवानिवृत्त प्राचार्य पंडित शिवकुमार शुक्ला अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
राघवन दंपति के एक पुत्र और एक पुत्री विदेश में बस चुके हैं। इसके बाद दोनों देशाटन कर रहे हैं। इसी दौरान उन्हें अचानक बैतूल की याद आई और वे नागपुर तक हवाई यात्रा कर वहां से वाहन किराए पर लेकर बैतूल पहुंचे थे।
सम्मान कार्यक्रम में राघवन ने एक रोचक प्रसंग भी साझा किया था। उन्होंने बताया कि बैतूल गजेटियर में उल्लेख है कि जो अधिकारी मुक्तागिरी जैन मंदिर के 26 नंबर मंदिर के दर्शन कर लेते हैं, उनका तबादला हो जाता है। उन्होंने भी वहां दर्शन किए थे और इसके बाद उनका तबादला सागर जिले में हो गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक पांडे, रामकिशोर पंवार, संजय शुक्ला पप्पी, राजकुमार मालवीय, नंदकिशोर पंवार, आनंद सोनी, सुनील पलेरिया और मोहित पंवार मौजूद थे। रामकिशोर पंवार ने उन्हें अपनी दो पुस्तकें भी भेंट की थीं।




