प्रशासन की चुप्पी से सचिवों में बढ़ी नाराजगी, काम बंद-कलम बंद की तैयारी

सचिव से मारपीट मामला

बैतूल। चिचोली विकासखंड में पदस्थ पंचायत सचिव के साथ हुई मारपीट की घटना को लेकर मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन द्वारा जिला मुख्यालय पर दिए गए तीन दिवसीय अल्टीमेटम का एक दिन बीत जाने के बाद भी दोषी आरोपी के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से जिलेभर के पंचायत सचिवों में नाराजगी और असंतोष गहराता जा रहा है। प्रशासन की चुप्पी को लेकर संगठन ने आंदोलन को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है।

मंगलवार 3 फरवरी को जिला मुख्यालय बैतूल पहुंचकर मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह राजपूत, नर्मदापुरम के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष देवनाथ बागमरे एवं जिला अध्यक्ष लक्ष्मीचंद अमरुते के नेतृत्व में जिले के दसों विकासखंडों के अध्यक्षों और सैकड़ों पंचायत सचिवों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में दोषी आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई, पंचायत सचिवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, शासकीय सेवकों के सम्मान और संरक्षण के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने सहित जनपद पंचायत स्तर पर साप्ताहिक बैठक के स्थान पर मासिक बैठक आयोजित करने और प्रत्येक माह 1 से 5 तारीख के बीच वेतन भुगतान की मांग की गई थी।

ज्ञापन सौंपते समय संगठन ने स्पष्ट रूप से तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी थी कि यदि निर्धारित समयसीमा में न्यायोचित कार्रवाई नहीं की गई तो पंचायत सचिव काम बंद-कलम बंद हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। अल्टीमेटम का पहला दिन बीत जाने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने से संगठन में रोष और बेचैनी का माहौल है।

प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह राजपूत ने पूर्व में स्पष्ट किया था कि पंचायत सचिव शासन और जनता के बीच सेतु का कार्य करते हैं, ऐसे में उन पर हमला निंदनीय है। वहीं जिला अध्यक्ष लक्ष्मीचंद अमरुते और संभाग के कार्यवाहक अध्यक्ष देवनाथ बागमरे ने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

इस आंदोलन के दौरान जिले के दसों ब्लॉक अध्यक्ष राजेन्द्र गंगारे, विजय मालवी, धनराज बड़ोदे, राजू पंडाग्रे, संतोष लोखंडे, रोशन यादव, राजेन्द्र झरबड़े, नामदेव खाड़े, रामदास बारपेटे, मनोहर बमोरिया सहित बड़ी संख्या में पंचायत सचिव उपस्थित रहे। संगठन ने साफ संकेत दिए हैं कि अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं और अगला कदम निर्णायक होगा।

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