गंगा-नर्मदा घाटों की तर्ज पर पारसडोह ताप्ती तट विकसित करने की मांग।
अंतिम संस्कार में हो रही परेशानी, पारसडोह ताप्ती घाट निर्माण को लेकर ग्रामीण एकजुट।

बैतूल। पारसडोह स्थित पवित्र मां ताप्ती नदी तट पर सुरक्षित घाट, पक्की सीढ़ियां और सीसी रोड निर्माण की मांग अब क्षेत्र में जनआस्था और जनसुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन गई है। मां सूर्यपुत्री ताप्ती जागृति समिति के नेतृत्व में 17 गांवों के ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग उठाई है।
ताप्ती भक्त रविन्द्र मानकर एवं समिति पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर को सौंपे आवेदन में बताया कि गौला, रावा, पौनी, कुटखेड़ी, लिहदा, बारव्ही, सोंपई, सोनखेड़ी, खेड़ीकोर्ट, निमनवाड़ा, ऐनखेड़ा, साईखेड़ा और टेमझिरा सहित आसपास के लगभग 17 गांवों के लोग अंतिम संस्कार, दशक्रिया, स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पारसडोह ताप्ती घाट पहुंचते हैं। बावजूद इसके यहां सुरक्षित घाट और पक्के मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में मोक्षधाम क्षेत्र क्षतिग्रस्त स्थिति में है। अस्थायी रूप से किया गया मुरम भराव बरसात में बहने की आशंका बनी हुई है। कई बार लोगों को नदी के भीतर ही अंतिम संस्कार करना पड़ता है, जिससे ताप्ती नदी का जल दूषित होने का खतरा भी बढ़ रहा है। वर्षा ऋतु में नदी किनारे फिसलन और कच्चे रास्तों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। बुजुर्गों, महिलाओं और अंतिम संस्कार में शामिल लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मां सूर्यपुत्री ताप्ती जागृति समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामकिशोर पंवार ने कहा कि यह केवल निर्माण कार्य का मामला नहीं, जनआस्था, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। समिति और ग्रामीणों ने प्रशासन से गंगा और नर्मदा घाटों की तर्ज पर पारसडोह ताप्ती घाट का व्यवस्थित विकास करने की मांग की है, ताकि श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को सुरक्षित सुविधाएं मिल सकें।
कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं ताप्ती भक्तों ने कलेक्टर को पारसडोह तट का निरीक्षण करने के लिए आमंत्रित किया है।




